छत्तीसगढ़: बीएड-डीएड अनिवार्य

रायपुर | समाचार डेस्क: छत्तसीगढ़ में जिन शिक्षाकर्मियों ने बीएड या डीएड नहीं किया है उनपर खतरा मंडरा रहा है. पंचायत तथा ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 6 मई को आदेश निकाला है कि जिन शिक्षाकर्मियों ने अभी तक बैचेलर ऑफ एडुकेशन या डिप्लोमा इन एडुकेशन की परीक्षा पास नहीं की है उन्हें नियमित नहीं किया जायेगा. इसके अलावा न तो उन्हें वेतन वृद्धि का लाभ मिलेगा और नही उन्हें स्थानांतरण मिलेगा.

एक अनुमान के अनुसार छत्तीसगढ़ में ऐसे शिक्षाकर्मियों की संख्या 5 हजार से ज्यादा है जिन्होंने यह कोर्स पास नहीं किया है. साल 2012-13 में ही करीब 40 शिक्षाकर्मियों ने छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल से डीएड की परीक्षी दी थी जिसमें से 3 हजार ने छः अवसरों के बाद भी परीक्षा में सफलता नहीं पाई है.

नियमानुसार छः से ज्यादा अवसर नहीं दिया जाता है. अब ये शिक्षाकर्मी 7वें अवसर की मांगकर रहे हैं. अब ये शिक्षा मंत्री, माशिमं दफ्तर और राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के चक्कर काट रहे हैं.

गौरतलब है कि राज्य में निजी और सरकारी स्कूलों में 27 हजार 529 शिक्षक हैं, जिन्होंने डीएड, बीएड नहीं किया है. इनमें से ज्यादातर शिक्षक निजी स्कूलों में हैं. इनकी संख्या 21 हजार 418 है. सरकारी स्कूलों में 5147 और अनुदान प्राप्त स्कूलों में 964 अप्रशिक्षित शिक्षक हैं.

वहीं, सुब्रत साहू शिक्षा सचिव ने कहा है “फेल होने वाले शिक्षकों और डीएड-बीएड नहीं करने वालों की नौकरी के लिए खतरा है, यह अभी नहीं कह सकते हैं, लेकिन ऐसे शिक्षकों को चेतावनी देंगे. डीएड में छह बार शिक्षकों को सातवां अवसर दे या नहीं, इस पर फैसला होना अभी बाकी है.”

बहरहाल शिक्षाकर्मियों में हड़कंप मचा हुआ है कि आगे क्या होगा.

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