सिमी के कथित आतंकियों को जमानत

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ में सिमी के 14 कथित आतंकियों को ज़िला कोर्ट से जमानत मिल गई है. इन लोगों पर बोधगया विस्फोट करने के अलावा नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश रचने का आरोप था. इन लोगों पर रांची में भी आतंकी कार्रवाई का आरोप लगाया गया था. पुलिस ने दावा किया था कि इन कथित आतंकियों ने सात मानव बम भी तैयार किये थे.

सोमवार को इन सभी कथित खूंखार आतंकियों को 50-50 हज़ार के मुचलके पर जमानत दी गई है. आतंकवादी होने के आरोप में गिरफ्तार 2 लोगों को पहले ही जमानत मिल चुकी है. इन सभी की गिरफ्तारी के समय इसे देश के सबसे बड़ा आतंकी गिरोह के रहस्योद्घाटन का दावा किया गया था. मामले की जांच एनआईए भी कर रही थी. लेकिन इन सभी लोगों की जमानत के बाद पुलिस के दावे पर सवाल खड़े हो गये हैं.


गौरतलब है कि पिछले साल पुलिस ने विधानसभा चुनाव के समय इन लोगों को गिरफ्तार किया था. छत्तीसगढ़ के तत्कालीन पुलिस महानिदेशक रामनिवास ने दावा किया था कि आरोपियों ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमले की पूरी तैयारी कर रखी थी. मोदी की सभा के पूर्व आतंकियों ने कानपुर, दिल्ली तथा प्रदेश के अंबिकापुर जाकर रेकी की थी, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था सख्त होने के कारण वे कामयाब नहीं हो पाए.

एक प्रेस कांफ्रेस में डीजीपी ने कहा था कि पकड़े गए आतंकियों से पूछताछ में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं. अब तक आरोपियों से हुई पूछताछ में यह स्पष्ट हो गया है कि उमेर सिद्दीकी एवं इससे जुड़े सिमी संगठन के अन्य लोगों ने यहां एक बड़ी वारदात को अंजाम देने की पूरी तैयारी की थी, मगर पुलिस की पकड़ में आने के बाद उनकी साजिश नाकामयाब हो गई.

डीजीपी रामनिवास ने दावा किया था कि छत्तीसगढ़ की राजधानी में पकड़े गए आंतकी उमेर सिद्धीकी ही बोधगया में हुए बम विस्फोट का मास्टर माइंड था. उसने इस विस्फोट की साजिश रची थी और हमलावरों को छुपाने की योजना बनाई थी.

डीजीपी के अनुसार उमेर सिद्धीकी ने पूछताछ में यह कबूला है कि बोधगया विस्फोट की साजिश उसी ने रची थी और उसने इस संबंध में पुलिस को विस्तृत व सूक्ष्म विवरण दिया था. पटना विस्फोट की भी जानकारी इसने कबूली थी. उमेर ने फरार आतंकियों का हैदराबाद विस्फोट में शामिल होना कबूला था, जिसकी कथित पुष्टि एनआईए के रिकार्ड से भी करने का दावा रामनिवास ने किया था.

पुलिस का आरोप था कि इस मामले में गिरफ्तार उमेर का संपर्क सिमी के बड़े पदाधिकारियों और इंडियन मुजाहिदीन से था और उनका अगला निशाना नरेंद्र मोदी थे. वह छत्तीसगढ़ माड्यूल के रूप में अपना पृथक संगठन चला रहा था और सिमी के कार्यकर्ता उसे आमीर यानी चीफ के रूप में जानते थे.

पुलिस का दावा है कि छत्तीसगढ़ पुलिस की खुफिया शाखा विगत तीन साल से इस संगठन से जुड़े उमेर सिद्धीकी और उसके साथियों की निगरानी कर रही थी. कुछ दिनों पूर्व निगरानी के दौरान विदेशी भाषा में भेजे गए संदेश के बारे में पुलिस को जानकारी हुई जिसमें नरेंद्र मोदी का जिक्र था.

पुलिस का कहना है कि यह संदेश सामान्य नहीं था, इसलिए छत्तीसगढ़ की खुफिया एजेंसी ने 17 अगस्त को आईबी को इस बारे में जानकारी दी थी. इसके बाद 11 एवं 12 नवंबर को पुन: कुछ जानकारी मिली जो काफी महत्वपूर्ण थी. यह जानकारी नरेंद्र मोदी की सुरक्षा के संबंध में थी. डीजीपी के अनुसार 14 नवंबर की शाम तक छत्तीसगढ़ के इंटेलीजेंस विभाग के एटीएस द्वारा उक्त जानकारियों को फॉलो करते समय कुछ संदिग्ध गतिविधियों एवं बाहरी व्यक्तियों के क्षेत्र में आने की भनक लगी और उमेर सिद्धीकी तथा उसके सात साथियों की गिरफ्तारी की गई.

उस समय एडीजी मुकेश गुप्ता ने दावा किया था कि कि उमेर ने बताया था कि पटना ब्लास्ट के 4 आरोपी हैदर अली उर्फ अब्दुला पिता मोह अलाम अंसारी, नूमान आलम उर्फ फिरोज पिता सुल्तान, तौफीक उर्फ आसिफ पिता तजमुल अंसारी एवं मुजीबुल्ला घटना के बाद राउरकेला से भागकर इसके पास आए थे. उन्होंने यहां लंबे समय तक रुकने के उद्देश्य से किराये का घर लिया था. उसमें रुकने की समस्त सुविधाएं मुहैया कराई गई थी.

एडीजी गुप्ता के अनुसार रेड करने पर वे चारों व्यक्ति सामान छोड़कर फरार हो गए. उमेर सिद्धीकी ने पूछताछ में बताया कि वह सिमी के सभी बड़े लीडर्स जैसे सफदर नागोरी, कमरुद्दीन नागोरी, आमीर परवेश, मोहम्मद अली, इरफान मसूरी, इनामुर रहमान तथा खंडवा जेल से फरार अबू फैजल से 2002 से संपर्क में रहा है.

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