सुकमा स्मार्ट सिटी क्यों नहीं?

रायपुर | विशेष संवाददाता: छत्तीसगढ़ के दो बड़े शहरों को स्मार्ट सिटी बनाने की कवायद चल रही है. जिसमें से रायपुर का नाम तय माना जा रहा है तथा दूसरे के लिये बिलासपुर और दुर्ग-भिलाई में होड़ सुनाई में दे रही है. इन दावेदारियों के बीच यक्ष प्रश्न यह है कि छत्तीसगढ़ के कम विकसित शहरों जैसे अंबिकापुर, रायगढ़ या जगदलपुर को क्यों नहीं केन्द्र सरकार के स्मार्ट सिटी की योजना के तहत स्मार्ट बनाया जाता है.

अब तक पहले से खाये-पीये-अघाये शहरों को ही और स्मार्ट बनाने की कोशिश की जा रही है. जाहिर है कि पहले से कुछ स्मार्ट सिटियों को और स्मार्टर बनाना सरकार का असल मकसद है. केन्द्र सरकार देश के 100 शहरों को स्मार्ट सिटी की योजना में शामिल करने जा रही है. कयास लगाये जा रहें हैं कि अमुक-अमुक का नाम हो सकता है तथा फलाने-फलाने को स्मार्ट नहीं बनाया जाने वाला है.

स्मार्ट सिटी के घोषित उद्देश्यों के अनुसार आने वाले समय में शहरीकरण के बढ़ते बोझ को झेलने के लिये स्मार्ट सिटी बनाई जाने वाली हैं. जिनमें पानी, बिजली, परिवहन, निस्तारी, पर्यावरण, भवन तथा शासन स्मार्ट होगा.

विशेषज्ञों के अनुमान के अनुसार आने वाले समय में प्रति मिनट 25-30 व्यक्ति गांवों से भारतीय शहरों की ओर पलायन करने वाले हैं. इसी अनुमान के अनुसार साल 2050 तक भारतीय शहरों में 84 करोड़ लोग रहने लगेगे. इसी जरूरत को ध्यान में रखकर केन्द्र सरकार देश के 100 शहरों को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने जा रही है.

अब सवाल उठता है कि आखिर क्यों पहले से बने बनाये महानगरों पर शहरीकरण का बोझ और बढ़ाने की योजना है. जाहिर है कि इससे गांव से लोगों का शहरों की ओर रोजगार की खोज में पलायन बढ़ता जायेगा. कुछ सालों बाद स्मार्ट भी अंधाधुंध शहरीकरण के बोझ के नीचे पिसने लगेंगे.

इसके बजाये यदि उदाहरण के तौर पर छत्तीसगढ़ के बस्तर, कोरिया तथा सरगुजा के शहरों को विकसित किया जाये तो समस्या का निराकरण हो सकता है. जिस अंतिम आदमी तक विकास पहुंचाने की कथित कोशिश के तहत प्रधानमंत्री सुकमा पहुंचे थे, उस सुकमा को ही अगर स्मार्ट सिटी बनाया जाये, इससे अच्छी बात क्या होगी. प्रधानमंत्री जी, सुन रहे हैं ?

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