छत्तीसगढ़: 40 तहसीलों में सूखे की आहट

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ के 40 तहसीलों में कम वर्षा के कारण सूखे की आहट है. छत्तीसगढ़ के 18 तहसीलों में 70 से 80 प्रतिशत तक, 14 तहसीलों में 60 से 70 प्रतिशत तक, जबकि आठ तहसीलों में 60 प्रतिशत से कम बारिश हुई है. राज्य के कुछ जिलों के कुछ इलाकों में मानसून की बारिश अचानक थम जाने से फसलों की कमजोर स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने सोमवार शाम अपने निवास कार्यालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबंधित संभागीय कमिश्नरों और जिला कलेक्टरों की आपात बैठक ली.

राजस्व और आपदा प्रबंधन अधिकारियों तथा जिला कलेक्टरों ने बैठक में यह भी बताया कि फिलहाल फसलों की स्थिति आम तौर पर सामान्य है, लेकिन निकट भविष्य में पर्याप्त बारिश नहीं होने पर कुछ इलाकों में फसल प्रभावित हो सकती है.

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को अगले दस दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं होने पर संबंधित क्षेत्रों के किसानों की मदद के लिए आपात कार्य योजना तैयार करने के निर्देश दिए और कहा कि उसमें नाला बंधान और वैकल्पिक फसलों के साथ-साथ अन्य उपायों को भी शामिल किया जाए. डॉ. सिंह ने कहा कि जिन जलाशयों में पर्याप्त पानी नहीं है, वहां पेयजल और निस्तारी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए और इसके लिए पानी सुरक्षित रखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि अगले 40 दिन खरीफ फसलों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होंगे.

उल्लेखनीय है कि अब तक छत्तीसगढ़ की 150 तहसीलों में से 64 तहसीलों में 100 प्रतिशत से ज्यादा बारिश हो चुकी है, इसके अलावा 20 तहसीलों में 90 प्रतिशत से 100 प्रतिशत तक, 26 तहसीलों में 80 से 90 प्रतिशत तक, 18 तहसीलों में 70 से 80 प्रतिशत तक, 14 तहसीलों में 60 से 70 प्रतिशत तक औसत बारिश हो चुकी है, जबकि आठ तहसीलों में 60 प्रतिशत से कम बारिश हुई है. जिन आठ तहसीलों में 60 प्रतिशत से कम वर्षा हुई है, उनमें बिलाईगढ़, बागबाहरा, सरायपाली, बेमेतरा, नवागढ़, छुरिया, लोरमी और केशकाल शामिल हैं.

अधिकारियों ने बैठक में बताया कि दुर्ग संभाग में तांदूला सिंचाई परियोजना ओर और रायपुर संभाग में महानदी सिंचाई परियोजना से कुछ जरूरतमंद इलाकों में पानी दिया जा रहा है, वहीं कबीरधाम जिले के क्षीरपानी, कर्रानाला और सूतियापाठ जलाशयों से पानी छोड़ा गया है.

सिंचाई जलाशयों की स्थिति
गौरतलब है कि 18 अगस्त तक की स्थिति में छत्तीसगढ़ के 42 छोटे-बड़े सिंचाई जलाशयों में अब औसत रूप से 63 प्रतिशत जलभराव है. इनमें से कोसारटेडा, श्याम और खपरी जलाशय लबालब भरे हैं. गंगेरल बांध में क्षमता का 97 प्रतिशत जल भराव की स्थिति है.

जल संसाधन विभाग के स्टेट डाटा सेन्टर से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार 18 अगस्त की सुबह की स्थिति में सभी जलाशयों में तीन हजार 957 मिलियन घन मीटर पानी भरा हुआ है, जबकि इनकी कुल जल भराव क्षमता छह हजार 267 मिलियन घन मीटर है.

स्टेट डाटा सेंटर की रिपोर्ट के अनुसार मिनीमाता बांगो बांध 43.6.96 प्रतिशत, तांदुला जलाशय 40.77 प्रतिशत, दुधावा जलाशय 60.79 प्रतिशत, सिकासेर जलाशय 83.80 प्रतिशत, खारंग जलाशय 46.04 प्रतिशत, सोढूंर जलाशय 70.99 प्रतिशत, माड़मसिल्ली जलाशय 60.30 प्रतिशत, कोडार जलाशय 34.52 प्रतिशत, मनियारी जलाशय 70.88 प्रतिशत, खरखरा जलाशय 68.35 प्रतिशत, गोंदली जलाशय 29.64 प्रतिशत, परालकोट जलाशय 71.27 प्रतिशत, छिरपानी जलाशय 65.65 प्रतिशत, पिपरियानाला जलाशय 76.80 प्रतिशत, बल्लार जलाशय 22.50 प्रतिशत, सुतियापाट जलाशय 94.86 प्रतिशत तथा मोंगरा बैराज जलाशय 78 प्रतिशत भरा है.

इसी प्रकार मरोदा जलाशय में क्षमता का 72.40 प्रतिशत, सरोदा जलाशय में 37.55 प्रतिशत, घोंघा जलाशय में 53.27 प्रतिशत, मटियामोती जलाशय में 62.61 प्रतिशत, झुमका जलाशय में 78.31 प्रतिशत, गेजटेंक जलाशय में 42.28 प्रतिशत, खम्हारपाकुट जलाशय में 88.75 प्रतिशत, केशवा जलाशय में 23.15 प्रतिशत, कर्रानाला जलाशय में 86.35 प्रतिशत, बांकी जलाशय में 55.24 प्रतिशत, केदारनाला जलाशय में 60.29 प्रतिशत, किनकारीनाला जलाशय में 44.33 प्रतिशत, कुवंरपुर जलाशय में 68.55 प्रतिशत, बेहारखार जलाशय में 69.66 प्रतिशत, खपरी जलाशय में 99.49 प्रतिशत, कुम्हारी जलाशय में 17.27 प्रतिशत, बरनई जलाशय में 63.59 प्रतिशत, पेंड्रावन जलाशय में 35.91 प्रतिशत, रूसे जलाशय में 42.37 प्रतिशत, पुटकानाला जलाशय में 56.76 प्रतिशत, मयाना जलाशय में 49.11 प्रतिशत तथा धारा जलाशय में क्षमता का 52.76 प्रतिशत जल भराव हो गया है.

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