छत्तीसगढ़ में फरार का भी बयान

बिलासपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ में जिस अधिकारी को फरार बताया जा रहा था उसी का पुलिस के आईजी ऑफिस में बयान लिया गया. जबकि पहले ही हाईकोर्ट में पुलिस ने शपथ पत्र देकर उस अधिकारी को फरार बताया था. मामला हाईकोर्ट में पहुंचा तो छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव, डीजीपी, पंचायत सचिव, रायपुर आईजी समेत 11 को नोटिस जारी कर 6 हफ्तों में जवाब मांगा गया है.

मिली जानकारी के अनुसार पंचायत मंत्री अजय चंद्राकर के खिलाफ पंचायत विभाग के पूर्व विशाखा कमेटी की चेयरमैन डॉ. मंजीत बल ने प्रताड़ना का मामला जिला कोर्ट में लगाया था. जिला कोर्ट ने इस मामले में पुलिस से जांच रिपोर्ट मांगी थी. जिसके बाद रायपुर पुलिस ने आईजीपी के ऑफिस में डॉ. मंजीत बल सहित पंचायत विभाग के कई अफसरों के बयान लिये थे.

इनमें पंचायत विभाग के उस डिप्टी डायरेक्टर कमलकांत तिवारी का भी बयान लिया गया जिस पर पहले से धोखाधड़ी का मामला दर्ज था और पुलिस के दवारा उसे हाइकोर्ट में शपथ पत्र देकर फरार बताया गया था.

डॉ. मंजीत बल ने इसी मामले में हाईकोर्ट में पिटीशन दायर की थी जिसके बाद 11 लोगों को नोटिस जारी किया गया है.

गौरतलब है कि पंचायत विभाग के डिप्टी डायरेक्टर कमलकांत तिवारी पर राज्यपाल का फर्जी हस्ताक्षर करने का मामला है तथा उन्हें पुलिस द्वारा फरार बताया गया था.

इससे सवाल खड़ा होता है कि जिस अधिकारी को पुलिस ने हाईकोर्ट में शपथ पत्र देकर फरार बताया गया था उसका पुलिस के आईजी ऑफिस में बुलाकर बयान कैसे लिया जा सकता है.

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