चिट्ठी के भूचाल से भाजपा परेशान

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव सुनिल कुमार की चिट्ठी ने सियासत में भूचाल ला दिया है. भाजपा नेताओं ने सोचा भी नहीं होगा कि चुनावी साल में मुख्य सचिव पर किया गया उनका वार भारी पड़ जाएगा. मुख्य सचिव के खिलाफ की गई उनकी शिकायत अब उनके ही लिये फांस बन गई है. राज्य के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा है कि उनके पास चिट्ठी आई है और वे इसका अध्ययन करने के बाद ही कुछ कहेंगे.

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव सुनिल कुमार ने अपने ही ख़िलाफ़ सीबीआई जांच की मांग की है. उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री रमन सिंह को इस आशय का पत्र लिखा है. असल में छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव सुनिल कुमार, अपर मुख्य सचिव डीएस मिश्रा और राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान की प्रबंध संचालक रहीं आर संगीता के ख़िलाफ़ कथित भ्रष्टाचार की शिकायत की गई थी. केंद्र के मुख्य सतर्कता आयुक्त से की गई इस शिकायत में आरोप लगाया गया था कि राज्य में फ़र्नीचर और साइकिल की ख़रीदारी में कथित रुप से घोटाला हुआ है. शिकायत में इन अफ़सरों पर उन सामानों को अधिक क़ीमत पर ख़रीदने के आरोप लगाए गए थे.


इस शिकायत को लेकर राज्य के मुख्य सचिव सुनिल कुमार ने मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर कहा कि वे राज्य के सर्वोच्च प्रशासनिक पद पर बैठे हैं, ऐसे में उनके ख़िलाफ़ की गई शिकायत की जांच ठीक से नहीं हो पाएगी. उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में उनके ख़िलाफ़ की गई शिकायत की जांच सीबीआई से करवाना उचित होगा. सुनिल कुमार ने कहा कि व्यक्तिगत रूप से उनका मानना है कि जिन योजनाओं में आर्थिक मदद केन्द्र सरकार से की जाती है, उनमें गड़बड़ी एवं भ्रष्टाचार की शिकायतों की जांच सीबीआई द्वारा ही होनी चाहिए.

सुनिल कुमार अपने खिलाफ हुई शिकायत की ऐसी प्रतिक्रिया करेंगे, इसकी उम्मीद शिकायतकर्ताओं को भी नहीं रही होगी. शिकायत किनके इशारों पर हुई है, यह बात पिछले सप्ताह भर से राजनीतिक गलियारों में चर्चा में थी. शिकायत से पहले राज्य के 3 मंत्रियों की बैठक हुई. इन मंत्रियों की फाइलें सुनिल कुमार ने रोकी थी या फिर इसमें होने वाले करोड़ों के भ्रष्टाचार पर लगाम लगा दिया था. अपने खिलाफ कार्रवाई से तिलमिलाये मंत्रियों ने मुख्य सचिव को ही घेरने की योजना बनाई और उनकी शिकायत कर दी.

लेकिन अब उनकी यही शिकायत सरकार पर भारी पड़ रही है. सुनिल कुमार ने अपने खिलाफ सीबीआई जांच की मांग की है तो वे यह बात जानते हैं कि सीबीआई की जांच में कौन से चेहरे जनता के सामने उजागर होंगे. ऐसा तो होने से रहा कि सीबीआई केवल इसी मुद्दे की जांच करके चुपचाप बैठ जाएगी. जांच होगी तो कई गड़े मुर्दे उखड़ेंगे और लाल होते कई चेहरे पर कालिख पूत जायेंगे.

चुनावी साल में कांग्रेस किसी भी हाल में इस मुद्दे को हाथ से नहीं जाने देना चाहती. कांग्रेस चाहती है कि सीएस की चिट्ठी के आधार पर सीबीआई की जांच अगर हो जाये तो सरकार को बैकफुट पर धकेलना उनके लिये सरल होगा. रमन सिंह अगर इसकी जांच करवाते हैं तो कांग्रेस के लिये यह चुनावी मुद्दा बन सकता है और नहीं करवाते हैं तो भी यह मुद्दा बनेगा. सवाल जांच के बाद के परिणामों का भी है, जिसके बाद कई राज फाश हो सकते हैं.

पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने कहा है कि फर्नीचर व साइकिल की खरीदी मंत्रियों के माध्यम से की गई है, जिसमें भारी भ्रष्टाचार हुआ है. मुख्यसचिव ने मुख्यमंत्री को इस संबंध में पत्र लिखा है, इसके बाद सीबीआई जांच आवश्यक हो गई है. 60 करोड़ के फर्नीचर व साइकिल खरीदी में रमन सरकार के भ्रष्ट मंत्री लिप्त हैं. सीबीआई जांच करवाई जाती है तो सच्चाई जनता के सामने आ जाएगी. श्री जोगी ने कहा कि पाठ्य पुस्तक निगम में भी बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है. मामला उजागर होने के बाद प्रदेश सरकार ने टेंडर निरस्त कर भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने का प्रयास किया है. उक्त मामले की भी उच्चस्तरीय जांच जरूरी है.

राज्य में नेता प्रतिपक्ष कांग्रेस के रवींद्र चौबे कहते हैं- यह शर्मनाक है कि प्रशासन के सर्वोच्च पद पर बैठे एक सचिव को अपने खिलाफ ही सीबीआई जांच की मांग करनी पड़ी है. यह बताता है कि राज्य में भ्रष्टाचार का स्तर क्या है. सरकार को इस मामले समेत दूसरे मामलों की भी जांच करवानी चाहिये. जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो सके.

इधर राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान की तत्कालीन प्रबंध निदेशक एवं वर्तमान में महासमुंद की कलेक्टर आर. संगीता ने कहा है कि उन पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं. संगीता का कहना है कि राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत प्रदेश के 710 स्कूलों के लिए फर्नीचर की खरीदी जानी थी. स्कूल में आठ प्रकार के कमरों के लिए अलग-अलग फर्नीचर खरीदे जाने थे. इनमें चार क्लास रूम, लैब, लेबोटरी, लाइब्रेरी और आर्ट रुम शामिल थे. केंद्र सरकार द्वारा प्रत्येक स्कूल के लिए 7 लाख 37 हजार रुपए की राशि निर्धारित की गई है. फर्नीचर की खरीदी इसी राशि में की जानी थी. इसके लिए उन्होंने राज्य सरकार की एजेंसी सीएसआईडीसी से संपर्क किया. फर्नीचर के लिए उनके द्वारा भिलाई और अभनपुर की फैक्ट्री का निरीक्षण भी किया.

आर संगीता के अनुसार इसके बाद अभनपुर की फैक्ट्री को काम दिया गया. पहले चरण में कुल 60 स्कूलों के लिए फर्नीचर की खरीदी की गई. फर्नीचर अच्छे थे. इसलिए 100 स्कूलों के लिए और आर्डर दिया गया. उनके कार्यकाल में श्री कुमार द्वारा इन्हीं 160 स्कूलों में फर्नीचर खरीदी के आर्डर दिए गए हैं. इनकी कुल लागत लगभग 11 करोड़ रुपए के आसपास है. इसमें से केवल पौने दो करोड़ रुपए का ही भुगतान हुआ है. 25 लाख रुपए वैट के अलग से दिए गए हैं. ऐसे में करोड़ों के भ्रष्टाचार का आरोप गलत और बेबुनियाद है. सरकार ने खरीदी के लिए जो क्राइटेरिया निर्धारित कर रखा है, खरीदी के उसी के आधार पर की गई है. इसलिए इस प्रकार के आरोप पूरी तरह से तथ्यहीन हैं.

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