फिर रामगढ़ उत्सव की औपचारिकता

अंबिकापुर | समाचार डेस्क: रामगढ़ महोत्सव एक बार फिर महज औपचारिक कार्यक्रम बन कर रह जाएगा. पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश और यहां तक कि छत्तीसगढ़ के ही भोरमदेव जैसे महोत्सव की तुलना में रामगढ़ उत्सव की कोई पहचान ही नहीं बन पाई है और इस साल भी इस उत्सव के नाम पर जो कुछ हो रहा है, वह महज दूसरे-तीसरे दर्जे के उदासीन सरकारी आयोजन से अधिक कुछ नहीं होगा.

इस बार 13 एवं 14 जून को इस कथित महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है. महोत्सव के पहले दिन राजमोहनी देवी भवन अम्बिकापुर में शोध संगोष्ठी का आयोजन किया गया है. शोध संगोष्ठी कालीदास की साहित्य में लोक व पर्यावरण विमर्श, कालीदास की रचनाओं की वर्तमान में साहित्य की प्रासंगिकता, कालीदास के काव्यों में भौगोलिक स्थिति, कालीदास की रचनाओं में पुरातत्व, इतिहास एवं साहित्य एवं रामगढ़ की प्राचीनतम नाट्यशाला एवं रंगकर्म आदि विषयों पर आधारित है.

दोपहर में सरगुजा जिले से संदर्भित रामगढ़, कालीदास एवं सरगुजांचल के संबंध में प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित है. प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के विजेता को प्रथम पुरस्कार के रूप में 2110 रूपए, द्वितीय पुरस्कार के रूप में 1110 रूपए एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले को 500 रूपए नगद एवं प्रमाण पत्र दिया जाएगा.

महोत्सव के दूसरे दिन 14 जून को विकासखण्ड मुख्यालय उदयपुर के समीप स्थित रामगढ़ में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा.

जाहिर है, इनमें से किसी भी आयोजन को एक राज्यस्तरीय शक्ल देने की कोई असफल कोशिश भी नहीं की गई है. मैनपाट के नाम पर लाखों खर्च करने वाली सरकार ने इस रामगढ़ महोत्सव के आयोजन के लिये किसी बड़े कलाकार, शिक्षाकर्मी, संस्कृतिकर्मी को प्रदर्शन करने के लिये तो बुलाया ही नहीं है, ऐसे लोगों को भाग लेने के लिये भी आमंत्रित नहीं किया गया है.


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