आंय, अरे थोडा देख लीजिएगा

अंबिकापुर | संवाददाता : आंय, अरे थोडा देख लीजिएगा – अरे मुझे मेरा वीडियो. पैसा कमीशन हां वो अरे नहीं मैं तो कुछ जानता नहीं …मतलब अच्छा …नहीं सुनिए न ..आंय जरा देख लीजिएगा, समझिएगा.-
आई एन कैथवास,
मुख्य अभियंता, छगराविविक, सरगुजा मर्यादित

भ्रष्ट व्यवस्था से लड़ने की कवायद के लिए बना तंत्र तो असफल हो गया पर बिगड़े सिस्टम से लड़ रहे युवक ने भ्रष्टाचार को उजागर करने की कोशिश जरुर की है. मामला सरगुजा के सीएसपीसीडीसीएल (छत्तीसगढ स्टेट पॉवर डिस्टी्ब्यूशन कंपनी लि.) में चल रहे भ्रष्टाचार का है, जिसमें ईमानदार बेरोजगार युवकों के लिए काम कर पाना बेहद दुश्वार है.


बात-बेबात कमीशन मांगने और अपात्रों मगर चहेतों को काम देने के मामलों को लेकर हलाकान युवक ने पहले एंटी करप्शयन ब्यूरो से संपर्क साधा, सब कुछ तय भी हो गया, टीम भी आ गई, पर कार्यवाही के पहले ही सूचना लीक हो गई और अधिकारी कार्यालय पहुंचे ही नही. मगर युवक ने हार नही मानी और खुद ही पूरे मामले का स्टिंग कर कमीशनखोरी की बात सामने लाई है.

सरगुजा के सीएसपीडीएससीएल में विभिन्न निर्माण कार्यों और आपूर्ति के कामों की निविदा में भाग लेकर काम करने की कवायद में जुटे श्रवण कुमार रूपौलिया के लिए तब मुश्किलें आईं, जब उनसे हर काम पर कमीशनखोरी की मांग की जाने लगी. श्रवण कुमार का दावा है कि उसने यह वीडियो तब बनाया जब कि दो लाख के एक काम के लिए उनसे तीस हज़ार रुपए की मांग की गई थी.

श्रवण ने इस कमीशन की पहली किश्त के रूप में दस हज़ार रुपए कथित रुप से चीफ इंजीनियर आई एन कैथवास को दिये. इसी के ठीक बाद स्टिंग वीडियो ये बताता है कि टेंडर वर्क की बिलिंग का काम देखने वाली क्लर्क सरोज सार्वे श्रवण कुमार को अपने हिस्से का कमीशन दो हज़ार पांच सौ नब्बे का हिसाब कैलकुलेटर से बताते हुए यह कहती हैं- “90 रुपए छोड़ दो, तुम केवल ढाई हज़ार देना.”

इस पूरे घटनाक्रम की मय सीडी और लिखित शिकायत श्रवण कुमार ने एमडी सुबोध सिंह को भी की है मगर इस पूरे मसले पर कोई कार्यवाही की जानकारी अब तक नहीं हुई है.

युवक ने यह स्टिंग सीएसपीसीडीएससीएल के मुख्य कार्यालय में किया, जिसमें कथित रुप से रिश्वत के पैसे लेते चीफ इंजीनियर आई एन कैथवास कैद हुए हैं. इस स्टिंग में कार्यालय में पदस्थ सरोज सार्वे नामक महिला क्लर्क भी नमूदार हैं, जो बाकायदा कैलकुलेटर लेकर बिल पेश करने के बदले पैसे का हिसाब दे रही हैं.

छगराविविक मर्यादित का सरगुजा संभाग मुख्यालय में भ्रष्टाचार की चर्चा होती रहती है. मगर यह पहला मामला है, जबकि इस तरीके से स्टिंग ऑपरेशन करके इसकी हकीकत सामने लाई गई है.

श्रवण की लड़ाई में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वाली एजेंसियां भी नाकारा साबित हुई, लेकिन शुकराना इस बात का करना चाहिए कि व्यवस्था के फेल होने के बावजूद भ्रष्टाचार से लड़ने का जज्बाब श्रवण में बना हुआ है.

आखिरी दम तक लडूंगा – मैं काम करना चाहता हूं ईमानदारी से, पैसे होते तो काम क्यूं खोजता, यहां तो हर बात पर कमीशन है, वह भी जिसके मुंह से जो निकल जाए वो उतना मांगता है. इन्होंने हर जवाबदेह एजेंसी को प्रभावित कर दिया है, मगर ना थका हूं ना डरा हूं. लडूंगा, आखिरी दम तक लडूंगा.
श्रवण कुमार रूपौलिया, पीड़ित

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