छत्तीसगढ़: ग्रामीण विकास में अव्वल

रायपुर | एजेंसी: केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्यमंत्री सुदर्शन भगत ने छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार द्वारा संचालित ग्रामीण विकास की केंद्रीय योजनाओं और उपलब्धियों की प्रशंसा की है. उन्होंने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में इन योजनाओं के क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ का प्रदर्शन वास्तव में बहुत सराहनीय है.

भगत ने कहा कि राज्य के कई जिले नक्सल प्रभावित हैं, जहां गंभीर चुनौतियों और कठिनाईयों का सामना करते हुए भी अधिकारी और कर्मचारी शासन की जन कल्याणकारी योजनाओं पर अमल के लिए कड़ी मेहनत से काम कर रहे हैं और जरूरतमंद लोगों तक उनका फायदा भी पहुंच रहा है.

भगत ने विभिन्न योजनाओं की लक्ष्य पूर्ति के लिए कार्यों में और भी तेजी लाने की जरूरत बताई. केंद्रीय राज्यमंत्री भगत रविवार शाम राजधानी रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार के पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे. यह बैठक नवीन विश्राम भवन के सभा कक्ष में आयोजित की गई.

भगत ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में छत्तीसगढ़ को वर्ष 2009 से लगातार राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जा रहा है. उन्होंने इस वर्ष दंतेवाड़ा तथा नारायणपुर जिले को प्राप्त पुरस्कारों के लिए भी राज्य सरकार सहित दोनों जिलों की जनता और वहां के अधिकारियों को बधाई दी.

भगत ने दंतेवाड़ा जिले में मनरेगा के तहत जैविक खेती को बढ़ावा देने और सहकारिता के आधार पर किसानों को संगठित कर दूध का उत्पादन बढ़ाने के लिए शुरू की गई क्षीरसागर परियोजना की भी तारीफ की.

केंद्रीय राज्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव एम.के. राउत, राजस्व विभाग के सचिव केआर पिस्दा, छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक डॉ. मुकुंद हम्बर्डे और अन्य संबंधित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे.

विभिन्न योजनाओं की समीक्षा के बाद भगत ने कहा कि वर्षा जल संचय के लिए वाटरशेड परियोजना सहित महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में भी छत्तीसगढ़ में बेहतर कार्य हुए हैं.

उन्होंने राज्य शासन को केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन में सकारात्मक सहयोग जारी रखने का भरोसा दिलाया. भगत ने समीक्षा में यह जानकर भी प्रसन्नता जताई कि मनरेगा में ग्रामीणों को सालाना 100 दिनों के स्थान पर छत्तीसगढ़ सरकार ने 150 दिनों के रोजगार का प्रावधान किया है और इसमें 50 दिनों की मजदूरी राज्य बजट से दी जा रही है.

केंद्रीय राज्यमंत्री ने मनरेगा के कार्यो में लगी गर्भवती माताओं को एक माह का मातृत्व अवकाश दिए जाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किए गए विशेष प्रावधान की भी सराहना की.

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