छत्तीसगढ़: आदिवासी सुरक्षित नहीं

रायपुर | संवाददाता: क्या छत्तीसगढ़ में बहुलता के बावजूद आदिवासी सुरक्षित नहीं हैं? उल्लेखनीय है कि 2011 के जनगणना के आकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ की जनसंख्या 2.55 करोड़ है जिसमें आदिवासियों की संख्या 78 लाख है. जिसमें से करीब 72 लाख गांवों में तथा 5 लाख से ज्यादा शहरों में रहते हैं. छत्तीसगढ़, आदिवासियों के खिलाफ हो रहे अपराध के मामले में देशभर में 29 राज्यों में चौथे स्थान पर है. सरकारी आकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ में वर्ष 2014 में 721 अपराध हुये हैं. जिसका अर्थ है कि हर रोज छत्तीसगढ़ में आदिवासियों के खिलाफ तकरीबन दो अपराध होते हैं.

छत्तीसगढ़ से ज्यादा आदिवासियों के खिलाफ अपराध राजस्थान में 3952, मध्यप्रदेश में 2272 तथा ओडीशा में 1259 अपराध हुये हैं. उल्लेखनीय है कि इनमें से राजस्थान, मध्यप्रदेश तथा छत्तीसगढ़ में ‘अच्छे दिन आने वाले हैं’ की सरकारें हैं.

गौरतलब है कि देशभर में वर्ष 2014 में आदिवासियों के खिलाफ कुल 11,437 अपराध के मामले सामने आयें हैं जिनमें से राजस्थान, मध्यप्रदेश तथा छत्तीसगढ़ में ही 6,952 अपराध हुये हैं. अर्थात् इन तीनों राज्यों में ही आदिवासियों के खिलाफ आधे से ज्यादा अपराध हुये हैं. आकड़े चौंकाने वाले जरूर हैं परन्तु है सरकारी ही. राष्ट्रीय अपराध रिसर्च ब्यूरों की ताजा रपट में इस बात का खुलासा हुआ है.

छत्तीसगढ़ की तुलना में झारखंड में आदिवासियों के खिलाफ 432 अपराध, महाराष्ट्र में 443, कर्नाटक में 487 तथा तेलांगाना में 569 अपराध वर्ष 2014 में हुये हैं.

देशभर में आदिवासियों के खिलाफ जितने अपराध हुये हैं उनमें से राजस्थान में 34.5 फीसदी, मध्यप्रदेश में 19.9 फीसदी, ओडीशा में 11 फीसदी तथा छत्तीसगढ़ में 6.3 फीसदी अपराध हुये हैं.

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