छत्तीसगढ़ में फिर सोने की तलाश

रायपुर | समाचार डेस्क: छत्तीसगढ़ में एक बार फिर से सोने की तलाश शुरु हो गई है. रायपुर, बस्तर और रायगढ़ के बाद एक बार फिर से राज्य में सोने की तलाश छत्तीसगढ़ के महासमुंद और गरियाबंद जिले में की जा रही है. हालांकि यह खोज फिलहाल आरंभिक दौर में है लेकिन माना जा रहा है कि राज्य में ये दोनों खनिज भरपूर मात्रा में हो सकते हैं.

सूत्रों का कहना है कि परमाणु उर्जा विभाग और राष्ट्रीय भू-भौतिकी अनुसंधान संस्थान द्वारा लगभग 26 मीटर का वृत्ताकार रिंग तैयार कर वृत्ताकार रिंग को हेलिकाप्टर से 40 मीटर की दूरी पर लटकाकर सर्वे का कार्य किया जा रहा है.सरसीवां क्षेत्र की धरा में संभावित यूरेनियम एवं अन्य खनिज की तलाश में भारत सरकार द्वारा क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर हेलिकाप्टर की मदद से सर्वे कराया जा रहा है.


छत्तीसगढ़ के सरायपाली क्षेत्र में यूरेनियम और सोने के भंडार होने की संभावना है. पूर्व में ग्राम चिवराकुटा में ड्रिलिंग के माध्यम से आंशिक सर्वे के दौरान यूरेनियम की खोज की गई थी.

टेक्निकल आफिसर रामचन्द्र राव ने बताया कि हेलिकाप्टर में लटके रिंग को तीन अलग-अलग भागों में बांटा गया है जिसमें मैग्नेटिक्स, इलेक्ट्रो मैग्नेटिक्स, स्पेक्ट्रोमेटिक पैरामीटर लगे हैं. बताया जाता है कि हेलिकाप्टरों को रात में सरसीवां क्षेत्र में रखा जा रहा है.

राव ने यह भी बताया कि यह कार्य लगभग एक माह से निरंतर चल रहा है और उनकी टीम में वैज्ञानिक, पायलट और अन्य तकनीकी कर्मी शामिल हैं. हेलीबोर्न सर्वे के माध्यम से खनिज का पता लगाने वाली वृत्ताकार मशीन को सरायपाली सरसीवां एवं सारंगढ अंचल के आकाशीय मार्ग में घुमाया जा रहा है.

क्षेत्र में चल रहे सर्वे में 8 वैज्ञानिक शामिल हैं. यह कार्य सीनियर साइंटिस्ट आर राजकुमार और केआर किशोर के मार्गदर्शन में चल रहा है. वैज्ञानिकों के मुताबिक विद्युत चालक के माध्यम से यह पता करने का प्रयास किया जाएगा कि इस भूभाग में इस तरह के खनिज की उपलब्धता है या नहीं.

वहीं दूसरी ओर रेडियो एक्टिव रेडिएशन की गामा-रे स्पेक्ट्रोमेटिक मशीन के माध्यम से जमीन के भीतरी अवयवों को देखा जा सकेगा. रिंग के माध्यम से विद्युत तरंगों को एक्टिव कर धरती के भीतर 400 से 500मीटर तक के खनिज की पहचान की जा सकेगी. प्रतिदिन हेलिकाप्टर में इस रिंग को बांधकर 60 मीटर की उंचाई पर रखकर सर्वे किया जा रहा है.

वैज्ञानिकों की मानें तो सरायपाली क्षेत्र में यूरेनियम और सोने के भण्डार होने की संभावना है. पूर्व में ग्राम चिवराकुटा में ड्रिलिंग के माध्यम से आंशिक सर्वे के दौरान यूरेनियम की खोज की गई थी .

वर्तमान में भी हो रहे प्राथमिक सर्वे में अगर कुछ सार्थक परिणाम निकलते हैं तो सरायपाली और सरसीवां सहित छत्तीसगढ़ के लिए यह गौरव की बात होगी. इसके लिए तय किए गए दायरे में अभी तक 4009 किलोमीटर तक सर्वे का कार्य पूरा हो चुका है लेकिन परिणाम के लिए सर्वे से प्राप्त जानकारियों को मिनरल्स एण्ड डिफेंस डिपार्टमेंट हैदराबाद भेजा जाएगा.

इससे पहले भी पिछले 30 सालों में राज्य के कई हिस्सों में सोना और यूरेनियम की तलाश हो चुकी है. राजनांदगांव में तो भाभा परमाणु शोध संस्थान ने अपना कैंप भी बनाया था. इसके अलावा रायगढ़ के दमदमा, विष्णुपाली इलाके में भी यूरेनियम की तलाश चली थी.

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