छत्तीसगढ़: वन अधिकार पत्र जारी रहेगा

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ में वन अधिकार मान्यता पत्रों के लिए आवेदन लेना जारी रहेगा. उल्लेखनीय है कि इसे 15 अगस्त को बंद किये जाने के लिये जारी परिपत्र के बाद छत्तीसगढ़ सरकार पर आदिवासियों का हक छीनने का आरोप लगाया जाने लगा था. छत्तीसगढ़ शासन के 27 जुलाई को जारी किये गये पत्र का विरोध छत्तीसगढ़ बचाओं मंच तथा माकपा ने जोर-शोर से किया था.

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने मंगलवार अपने निवास कार्यालय में मुलाकात के लिए आए वनवासी विकास समिति के प्रतिनिधि मंडल को यह विश्वास दिलाया कि वन अधिकार मान्यता पत्रों के व्यक्तिगत और सामुदायिक दावा आवेदन लेना जारी रहेगा. पात्रता रखने वाले आवेदक कभी भी आवेदन कर सकते हैं. इस सिलसिले में राज्य सरकार के आदिम जाति और अनुसूचित जाति विकास विभाग द्वारा सभी संबंधित 24 जिलों के कलेक्टरों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं.


रायपुर, दुर्ग और बेमेतरा जिलों को छोड़कर अन्य 24 जिलों के कलेक्टरों से कहा गया है कि वे अपने-अपने जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक प्रचार-प्रसार के जरिए आम जनता को यह जानकारी दें कि वन अधिकार मान्यता पत्रों के लिए समिति के प्रतिनिधि मंडल ने अनुसूचित जनजाति और अन्य परम्परागत वन-निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम के तहत पात्रता रखने वाले आवेदन पत्रों का निराकरण निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सुनिश्चित करें. आवेदन प्रस्तुत करने के लिए कोई अंतिम तारीख निर्धारित नहीं की गई है. आवेदन लेना बंद नहीं किया जा रहा है.

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ने इस सिलसिले में मंगलवार ही आदिम जाति और अनुसूचित जाति विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव एन.के. असवाल को इस आशय का निर्देश दिया था कि वे तत्काल संबंधित जिला कलेक्टरों को परिपत्र जारी करें. उनके निर्देश पर अपर मुख्य सचिव द्वारा परिपत्र जारी कर दिया गया है.

छत्तीसगढ़ सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि अनुसूचित जनजाति और अन्य परम्परागत वन-निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम के तहत वन अधिकार मान्यता पत्रों के व्यक्तिगत और सामुदायिक दावा आवेदन लेना बंद नहीं किया गया है. आदिम जाति और अनुसूचित जाति विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव एन.के. असवाल ने मंगलवार मंत्रालय से रायपुर, दुर्ग, बेमेतरा को छोड़कर राज्य के शेष 24 जिलों के कलेक्टरों को इस आशय का परिपत्र जारी किया है.

उन्होंने परिपत्र में कहा है कि पिछले महीने की 27 तारीख को विभाग द्वारा एक परिपत्र जारी किया गया था, जिसमें 15 अगस्त 2015 तक समस्त ग्राम सभाओं से इस आशय का प्रमाण पत्र लेने के निर्देश है कि उनकी ग्राम सभा के अंतर्गत पात्रता रखने वाला कोई भी हितग्राही वन अधिकार पत्र से वंचित नहीं हैं. यदि ऐसी स्थिति किसी ग्राम सभा में है तो उसकी समीक्षा और निराकरण करने के निर्देश 27 जुलाई के परिपत्र में दिए गए हैं, लेकिन इस परिपत्र को जारी किए जाने के बाद विभाग के संज्ञान में यह आया है कि कतिपय स्तरों पर यह भ्रम की स्थिति निर्मित हुई है कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा अधिनियम लागू होने के आठ वर्ष बाद अब वन अधिकार पत्र दिए जाने से संबंधित कार्रवाई को बंद किया जा रहा है.

अपर मुख्य सचिव ने यह स्पष्ट किया है कि अधिनियम के प्रावधानों के तहत वन अधिकार पत्रों के लिए व्यक्तिगत और सामुदायिक दावा आवेदन हेतु कोई अंतिम तारीख निर्धारित नहीं है. उन्होंने जिला कलेक्टरों को इस बारे में समुचित प्रचार-प्रसार करवाने के भी निर्देश दिए हैं कि वन अधिकार मान्यत पत्रों के वितरण के लिए अधिनियम का क्रियान्वयन राज्य सरकार द्वारा बंद नहीं किया जा रहा है और पात्रता रखने वाले समस्त आवेदकों के प्रकरणों का निराकरण निर्धारित रीति से किया जाएगा. आवेदन प्रस्तुत करने या विचार करने के लिए कोई अंतिम तारीख निर्धारित नहीं है.

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