बाल्को घोटाला भी चुनावी मुद्दा

आलोक प्रकाश पुतुल | बीबीसी: छत्तीसगढ़ में वेदांता-स्टरलाइट के 1036 एकड़ ज़मीन पर अवैध कब्ज़ा को कांग्रेस ने चुनावी मुद्दा बना लिया है. कांग्रेस का आरोप है कि मुख्यमंत्री रमन सिंह ने वेदांता-स्टरलाइट को लाभ पहुंचाने के लिए क़ानूनी प्रावधानों का उल्लंघन किया है.

वहीं वेदांता-स्टरलाइट की बाल्को कंपनी के सीईओ रमेश नायर ऐसे किसी भी आरोप से इंकार कर रहे हैं.


ग़ौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने वेदांता-स्टरलाइट की बाल्को कंपनी को छत्तीसगढ़ में सरकारी ज़मीन पर कई सालों से अवैध कब्ज़ा करने के मामले में नोटिस जारी किया है. कांग्रेस नेता भूपेश बघेल की विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने राज्य सरकार को भी इस मामले में अपना जवाब पेश करने को कहा है.

छत्तीसगढ़ के कोरबा में 1965 में भारत सरकार के सार्वजनिक उपक्रम के रुप में स्थापित बाल्को का 2001 में विनिवेश किया गया था. ब्रिटिश कंपनी वेदांता की भारतीय सहयोगी कंपनी स्टरलाइट ने बाल्को के 51 प्रतिशत शेयर 551 करोड़ रुपये में खरीदे थे. इस विनिवेश के बाद 2005 में छत्तीसगढ़ के तत्कालीन राजस्व मंत्री और वर्तमान गृह मंत्री ननकीराम कंवर ने सबसे पहले कोरबा में वेदांता-स्टरलाइट के उपक्रम बाल्को द्वारा सरकारी ज़मीन पर अवैध कब्ज़ा किए जाने का मामला उठाया.

बाद में जून 2005 में जब वेदांता-स्टरलाइट के कब्ज़े की ज़मीन की छत्तीसगढ़ सरकार ने जांच की तो पता चला कि कंपनी ने 1036.42 एकड़ ज़मीन पर अवैध तरीके से कब्ज़ा कर रखा है. इसमें से बड़ा हिस्सा झाड़ का जंगल था.

वेदांता-स्टरलाइट के इस कब्ज़े को लेकर दो जनहित याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में लगाई गईं. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सेंट्रल इम्पावर कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि बाल्को के पास भू-स्वामित्व नहीं है लेकिन उसे इस मामले में आधिपत्य के आधार पर उपयोग की अनुमति दी जा सकती है.

बाल्को ने सेंट्रल इम्पावर कमेटी की इस रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. इस बीच 2008 में वेदांता-स्टरलाइट ने बाल्को में ज़मीन विवाद से संबंधित सभी मामले में समझौते के लिये छत्तीसगढ़ सरकार को प्रस्ताव भेजा. इस प्रस्ताव पर राज्य के महाधिवक्ता से राय मांगी गई तो उन्होंने सुप्रीम कोर्ट समेत दूसरी अदालतों में मामले के लंबित होने का हवाला देते हुए कहा कि ऐसा कोई समझौता नहीं किया जा सकता.

आरोप है कि राज्य के तत्कालीन मुख्य सचिव पी जॉय उम्मेन ने इस समझौते के आवेदन को स्वीकार करते हुये राज्य के मुख्यमंत्री रमन सिंह को समझौते के दस्तावेज़ पेश किए.

इधर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने इस दौरान एक याचिका पर सुनवाई करते हुये बाल्को के पक्ष में भूमि आवंटन किए जाने के लिये निर्देश दिए.

इस पर 26 अप्रैल 2010 को राजस्व विभाग ने विशेष अनुमति याचिका दायर करने का निर्णय लिया. उपलब्ध दस्तावेज़ों के अनुसार इसके अगले दिन ही यानी 27 अप्रैल को समझौते की फाइल एक के बाद एक आठ अफ़सरों तक होते हुए मुख्यमंत्री तक पहुंची.

इस फाइल में राजस्व विभाग ने स्पष्ट टिप्पणी लिखी कि बाल्को ज़मीन कब्ज़ा प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर करने के आदेश जारी किए जा चुके हैं. लेकिन राजस्व विभाग की पूरी टिप्पणी को कलम से काट कर वहां नई टिप्पणी लिख दी गई.

इसके अगले दिन मामले को मंत्रिमंडल में पेश किया गया और राजस्व विभाग के निर्णय को ताक पर रख कर कई निर्णय लिये गये.

बाल्को ज़मीन आवंटन में फ़र्जीवाड़े को उच्च न्यायालय में चुनौती देने वाले अधिवक्ता जी एस अहलूवालिया कहते हैं, “मुख्यमंत्री रमन सिंह और उनके मंत्रियों ने जो फ़ैसला लिया, वह पूरी तरह से अवैध, गैरक़ानूनी और वेदांता-स्टरलाइट को लाभ पहुंचाने वाला था. यह केंद्र सरकार और सर्वोच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण भी था.”

दूसरी ओर ज़मीन आवंटन मामले में राज्य सरकार द्वारा विशेष अनुमति याचिका दायर नहीं किए जाने के बाद कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने जब हाई कोर्ट में याचिका दायर की तो राज्य शासन ने आपत्ति दर्ज कराई कि यह बाल्को और राज्य शासन के बीच का मामला है.

इसके बाद भूपेश बघेल ने मामले में सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की.

कांग्रेस के प्रवक्ता और छत्तीसगढ़ प्रभारी भक्त चरणदास इस मामले को सीधे-सीधे मुख्यमंत्री रमन सिंह और बाल्को के व्यावसायिक हित से जोड़ते हैं.

भक्त चरणदास कहते हैं, “भाजपा सरकार के मुखिया रमन सिंह द्वारा बाल्को और पुष्प स्टील मामले में भारी अनियमितता और वित्तीय गड़बड़ी की गई है. इन बड़े औद्योगिक घरानों को भाजपा सरकार द्वारा फर्जीवाड़ा कर पिछले दरवाज़े से पहुंचाए गए अनुचित लाभ पर छत्तीसगढ़ की जनता अब न्याय करेगी. सुप्रीम कोर्ट के नोटिस ने बता दिया है कि छत्तीसगढ़ की सरकार और औद्योगिक घराने क्या कर रहे हैं.”

लेकिन वेदांता-स्टरलाइट के उपक्रम बाल्को के सीईओ रमेश नायर कंपनी द्वारा किसी भी ज़मीन पर अवैध तरीके से कब्ज़ा किए जाने का खंडन करते हैं. नायर कहते हैं, “अभी हमें सुप्रीम कोर्ट का नोटिस नहीं मिला है. इसलिये मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करुंगा. लेकिन बाल्को ने हमेशा क़ानून का सम्मान किया है और हमने क़ानून से परे जा कर कोई काम नहीं किया है.”

कांग्रेस नेता शैलेश नितिन त्रिवेदी का कहना है कि चुनाव प्रचार में पार्टी बाल्को में राज्य सरकार की संलिप्तता को मुद्दा बना रही है. कांग्रेस को उम्मीद है कि कोरबा समेत राज्य के दूसरे इलाक़ों में भी भाजपा सरकार का यह भ्रष्टाचार चुनावी मुद्दा बनेगा.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!