छत्तीसगढ़ विधानसभा: सवाल जो रह गये

रायपुर | समाचार डेस्क: छत्तीसगढ़ विधानसभा के शीतसत्र में केवल 75 तारांकित प्रश्न ही पूछे जा सके. इसके अलावा नियम 46 (2) के तहत परिवर्तित अतारांकित प्रश्न 130 तथा अतारांकित प्रश्न 172 ही पूछे जा सके. कुल मिलाकर विधायकों के द्वारा पूछे गये 377 प्रस्नों को ही सदन में रखा जा सका. गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ विधानसभा का शीतसत्र 15दिसंबर से 24 दिसंबर तक अधिसूचित था परन्तु नगरीय निकाय चुनावों के कारण 17दिसंबर को सत्रावसान कर दिया गया. उल्लेखनीय है कि शीतसत्र में छत्तीसगढ़ विधानसभा केवल 3 दिनों तक चली. जाहिर है कि इस शीतसत्र के बाकी के 4 कार्य दिवसों के समाप्त होने की प्रतीक्षा न की जा सकी. गौर करने वाली बात है कि अधिसूचना के अनुसार 24 दिसंबर तक के सत्र में 18-20-21दिसंबर को अवकाश था.

समाचारों के अनुसार, सदस्यों ने 1371 सवाल लगाए थे, लेकिन एक भी सवाल पर सदन में चर्चा नहीं हो सकी. विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि शीतकालीन सत्र के तीन दिवसों में कुल 6 घंटे 45 मिनट चर्चा हुई. उन्होंने बताया कि सत्र में 1371 प्रश्नों की सूचनाएं प्राप्त हुईं, जिनमें ग्राह्य तारांकित प्रश्न 488 रहे.


23 दिसंबर को मुख्यमंत्री के द्वारा सामान्य प्रसासन, वित्त, योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी, ऊर्जा, खनिज साधन, जनसंपर्क, सूचना प्रौद्योगिकी तथा जैव प्रौद्योगिकी, विमानन, खेल एवं युवा कल्याण, वन, सार्वजनिक उपक्रम, जन शिकायत निवारण तथा वाणिज्य एवं उद्योग विभाग पर पूछे गये प्रश्नों के जवाब सदन में दिये जाने थे. वहीं, महिला एवं बाल विकास मंत्री द्वारा अपने विभागों से संबंधित जवाब सदन में रखे जाने थे.

इसी तरह 24दिसंबर को पंचायत मंत्री द्वारा पंचायत एवं ग्रामीण विकास, पर्यटन तथा संस्कृति विभाग से संबंधित प्रश्नों के जवाब दिये जाने थे. उनके अलावा खाद्य मंत्री द्वारा खाद्य नागरिक आपूर्ति तथा उपभोक्ता संरक्षण, सहकारिता, ग्रामोद्योग और बीस सूत्रीय कार्यांवन पर पूछे गये प्रश्नों के जवाब सदन में रखे जाने थे.

19दिसंबर को कृषि मंत्री द्वारा कृषि, पशुधन विकास, मछली पालन, जल संसाधन, आयाकट तथा आदिम जाति विकास मंत्री द्वारा अपने विभाग एवं स्कूल शिक्षा के प्रश्नों के जवाब देना रह गया. इसी तरह से 22 दिसंबर को राज्स्व मंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री द्वारा सदन में पूछे गये प्रश्नों के जवाब रखे जाने थे.

चतुर्थ विधानसभा के तृतीय सत्र के समापन पर सदन को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल ने कहा कि नगरीय निकाय चुनाव और स्थानीय चुनावों की घोषित तिथियों से उत्पन्न परिस्थितियों की वजह से सबकी सहमति से 17 दिसंबर को ही सत्रावसान करने का निर्णय लिया गया है.

उल्लेखनीय है कि विधानसभा का सोमवार से शुरू हुआ सत्र काफी हंगामेदार रहा है. नसबंदी कांड, धान खरीदी और सिम्स में नवजातों बच्चों की मौत को लेकर विपक्ष ने सदन की शुरूआत से काफी हंगामा किया. इस बीच कांग्रेसी सदस्य लगातार निलंबित किए गए. फिर उनका निलंबन रद्द भी कर दिया गया, लेकिन विपक्ष ने सदन की कार्रवाई का लगातार बहिष्कार जारी रखा.

शीतकालीन सत्र के लगातार तीन दिनों तक विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण सदन का प्रश्नकाल नहीं चल सका. विस अध्यक्ष ने विधानसभा का बजट सत्र 2 मार्च से 3 अप्रैल के बीच आहूत किए जाने की संभावना जताई है.

तृतीय सत्र के समापन पर सदन को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल ने कहा कि नगरीय निकाय चुनाव और स्थानीय चुनावों की घोषित तिथियों से उत्पन्न परिस्थितियों की वजह से सबकी सहमति से 17 दिसंबर को ही सत्रावसान करने का निर्णय लिया गया है.

अग्रवाल ने कहा कि इस सत्र को इस बात के लिए याद रखा जाएगा कि इस सत्र का तीन दिवसीय बैठकों में प्रतिपक्ष के सदस्यों ने संसदीय कार्यों के संपादन में हिस्सा नहीं लिया, बल्कि विशेष राजनीतिक मांग पर जोर देते हुए संसदीय आचरण के अनुरूप कार्य नहीं किया. विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि शीतकालीन सत्र में तमाम प्रयासों के बावजूद सदन में गतिरोध की वजह से अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर विभिन्न माध्यमों से निर्धारित चर्चा नहीं हो सकी, यह खेदजनक है.

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