छत्तीसगढ़ का प्रयाग है राजिम

रायपुर | एजेंसी: छत्तीसगढ़ में मेला और मड़ई का दौर शुरू हो गया है. सूबे को देश में अलग से धार्मिक पहचान दिलाने वाले राजिम कुंभ के आयोजन की भी तैयारी जोरों पर है. 14 फरवरी के दिन से शुरू होनेवाले इस ‘छत्तीसगढ़िया कुंभ’ में देशभर के साधु-महात्मा हर साल बड़ी संख्या में पहुचते हैं.

यहां के संत समागम और शाही स्नान में इस बार विदेशी सैलानियों के भी पहुंचने के आसार हैं. राजिम छत्तीसगढ़ में महानदी के तट पर स्थित एक प्रसिद्ध तीर्थ है. इसे छत्तीसगढ़ का ‘प्रयाग’ भी कहते हैं. यहां के प्रसिद्ध राजीव लोचन मंदिर में भगवान विष्णु प्रतिष्ठित हैं. प्रतिवर्ष यहां पर माघ पूर्णिमा से लेकर शिवरात्रि तक एक विशाल मेला लगता है. यहां पर महानदी, पैरी नदी तथा सोंढुर नदी का संगम होने के कारण यह स्थान छत्तीसगढ़ का त्रवेणी संगम कहलाता है.

संगम के मध्य में कुलेश्वर महादेव का विशाल मंदिर स्थित है, जिसके गर्भगृह में स्वमेव महादेव विराजमान हैं. कहा जाता है कि वनवास काल में श्रीराम ने इस स्थान पर अपने कुलदेवता महादेव जी की पूजा की थी. इस स्थान का प्राचीन नाम कमलक्षेत्र है. ऐसी मान्यता है कि सृष्टि के आरंभ में भगवान विष्णु के नाभि से निकला कमल यहीं पर स्थित था और ब्रह्मा जी ने यहीं से सृष्टि की रचना आरंभ की थी, इसीलिए इसका नाम कमलक्षेत्र पड़ा.

छत्तीसगढ़ का प्रयाग कहे जानेवाले राजिम में 14 फरवरी से विशाल मेला, संत समागम और शाही स्नान का आयोजन होना है. पैरी नदी, सोंढुर नदी और महानदी के संगम स्थल पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं. संगम में अस्थि विसर्जन तथा संगम किनारे पिंडदान, श्राद्ध एवं तर्पण भी किया जाता है.

राजिम कुंभ के नाम से प्रतिवर्ष यहां होने वाले भव्य आयोजन में सरकार भी काफी धन खर्च करती है. इस बार राजिम में सभी अखाड़े के साधु-महात्मा पहुंच रहे हैं. धर्मस्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल कहते हैं, “राजिम कुंभ ने छत्तीसगढ़ को देश में अलग धार्मिक पहचान दिलाई है. इससे प्रदेश में पर्यटन के भी रास्ते खुले हैं. इस बार आयोजन और भी बेहतर तरीके से कराया जाएगा. इसके लिए विभागीय अफसरों को दिशा निर्देश दे दिए गए हैं. ”

प्रदेश में भाजपा सरकार की ‘हैट्रिक’ लगने के बाद राजिम कुंभ मेला पहला बड़ा धार्मिक आयोजन होगा, जिसमें देश-विदेश के लोग पहुंचेंगे.


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