चीनी कमजोरी भारत के लिये मौका

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: प्रधानमंत्री मोदी ने चीन की कमजोर अर्थव्यवस्था का लाभ उठाने के सिये उद्योगपतियों से कहा है. प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को देश के प्रमुख उद्योगपतियों से आव्हान् किया कि कमजोर आर्थिक हालात में निवेश करके उसके फायदा उठाये. उल्लेखनीय है कि सोमवार को भारतीय शेयर बाजार धड़ाम से गिर गया था. गौरतलब है कि चीन का विदेशी व्यापार अगस्त में साल दर साल आधार पर 9.7 प्रतिशत घटकर 320.8 अरब डॉलर रहा, जिसमें जुलाई में 8.8 प्रतिशत की गिरावट थी. मंगलवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों से यह जानकारी प्राप्त हुई है.

प्रधानमंत्री मोदी का पूरा जोर चीन की कमजोरी का फायदा उटाकर भारत को दुनिया में स्थापित करने का है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को केंद्रीय मंत्रियों, कारोबारियों और अर्थशास्त्रियों के साथ एक बैठक की और वैश्विक आर्थिक स्थिति तथा उसमें भारत के लिए लाभ उठाने के मौकों पर विचार-विमर्श किया. बैठक में हिस्सा लेने वाले मंत्रियों में थे वित्तमंत्री अरुण जेटली, रेलमंत्री सुरेश प्रभु, सड़क परिवहन और जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी, वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमण, पेट्रोलियम मंत्री धर्मेद्र प्रधान और कोयला, बिजली तथा नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल.


‘हालिया वैश्विक घटनाक्रम : भारत के लिए अवसर’ विषय पर आयोजित बैठक में भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन, नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया, मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रह्मण्यम और आयोग के सदस्य विवेक देबराय भी थे.

शीर्ष अधिकारियों में आर्थिक सचिव शक्तिकांत दास, वित्तीय सेवा सचिव अंजुली छिब दुग्गल, वाणिज्य सचिव रीता तेवतिया और उद्योग सचिव अमिताभ कांत भी बैठक में शामिल थे.

इस बैठक में आठ अर्थशास्त्री, 14 औद्योगिक प्रतिनिधि भी थे. इसमें भारतीय स्टेट बैंक की प्रमुख अरुंधति भट्टाचार्य, आईसीआईसीआई बैंक की प्रमुख चंदा कोचर, आईडीएफसी के राजीव लाल और बंधन बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी चंद्रशेखर घोष भी थे.

प्रमुख उद्योगपतियों में मुख्य रूप से रिलायंस इंडस्ट्रीज के प्रमुख मुकेश अंबानी, आदित्य बिड़ला समूह के प्रमुख कुमार मंगलम बिड़ला, अडानी समूह के अध्यक्ष गौतम अडानी, टाटा समूह के अध्यक्ष साइरस मिस्त्री, विप्रो अध्यक्ष अजीम प्रेमजी, सन फार्मा अध्यक्ष दिलीप सांघवी, आईटीसी के वाईसी देवेश्वर और आईएलएंडएफएस के अध्यक्ष रवि पार्थसारथी भी शामिल थे.

सरकारी कंपनियों के प्रतिनिधियों में प्रमुख रूप से भेल के प्रबंध निदेशक बी. प्रसाद राव और गेल के अध्यक्ष बी.सी. त्रिपाठी भी मौजूद थे.

अर्थशास्त्रियों में आदित्य बिड़ला समूह के मुख्य अर्थशास्त्री अजीत रानाडे, जेपी मोर्गन के मुख्य अर्थशास्त्री जहांगीर अजीज और मोर्गन स्टेनले के उभरते बाजारों के प्रमुख रुचिर शर्मा भी थे.

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