अब चीफ जस्टिस ने कही मन की बात

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया प्रधानमंत्री मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण से निराश हो गये हैं. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया टीएस ठाकुर ने अपने मन की बात कहते हुये कहा कि, “मुझे लगता है कि मैं अपने करियर के उस मुकाम पर पहुंच गया हूं जहां मैं अपने मन की बात कह सकता हूं. मैंने प्रधानमंत्री और क़ानून मंत्री का भाषण सुना. उम्मीद थी कि जजों की नियुक्ति पर कुछ कहा जाएगा. मैं सरकार से निवेदन करता हूं कि वो न्यायपालिका को कमज़ोर कर रहे मुद्दों पर तवज्जो दे, ख़ासतौर से जजों की नियुक्ति के मसले पर.” चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने एक शेर कहा, ‘गुल फेंके है औरों की तरफ बल्कि समर भी, ऐ खाना- बर-अंदाज-ए चमन कुछ तो इधर भी.’

उन्होंने कहा कि आप सब को दे रहे हैं, कुछ न्यायपालिका को भी तो दीजिए. कुछ नहीं तो नई नियुक्तियों के लिए की गई कोलेजियम की सिफारिशों को ही आगे बढ़ा दीजिए. कोलेजियम ने जनवरी में 75 उम्मीदवारों को जज बनाने की सिफारिश की थी, लेकिन सरकार ने उन पर अब तक फैसला नहीं किया है.

चीफ जस्टिस ने कहा कि अंग्रेजों के ज़माने में दस साल में फैसले आ जाते थे, लेकिन अब न्यायपालिका की दिक्कतों की वजह से देरी होती है.

जस्टिस ठाकुर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में ध्वजा रोहण कर रहे थे. उन्होंने कहा सब अंग्रेजी में बोल रहे हैं, लेकिन आज के दिन वह हिन्दुस्तानी में बोलेंगे. इस मौके पर कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद भी मौजूद थे. उन्होंने भी अपने भाषण में उच्च न्यायपालिका में नियुक्तियों पर कुछ नहीं कहा. जस्टिस ठाकुर ने कहा कि कानून मंत्री गांठ के बड़े पक्के हैं, उन्होंने जजों की नियुक्तियों पर कुछ नहीं कहा.

उन्होंने कहा कि देश में 1948 में 30 करोड़ आबादी थी और उसमें 10 करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे थे. आज आबादी सवा सौ करोड़ है और गरीबी रेखा के नीचे के लोगों की संख्या 40 करोड़ है. यह बढ़ी क्यों यह सोचने की बात है. सीजेआई ने रोजगार की कमी को भी रेखांकित किया और कहा कि चपरासी के लिए भर्ती निकालो तो एमए पास लोग आवेदन करते हैं.

उल्लेखनीय है कि दो दिन पूर्व सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश ने सरकार से जवाब मांगा था कि जजों को नियुक्त करने संबंधी कोलेजियम की सिफारिशों पर अमल क्यों नहीं किया जा रहा है. सीजेआई ने चेतावनी दी थी कि सरकार नियुक्तियों पर आगे बढ़े वरना उन्हें न्यायिक रूप से हस्तक्षेप करना पड़ेगा. सरकार ने जवाब के लिए चार हफ्तों का मय मांगा था.

समारोह में कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सरकार न्यायपालिका की स्वायत्ता का सम्मान करती है और उससे वह कभी समझौता नहीं करेगी. उच्च न्यायपालिका में नियुक्तियों पर उन्होंने कहा कि प्रक्रिया चल रही है, कोर्ट ने हमें उच्च न्यायपालिका में जजों की नियुक्ति का प्रक्रिया ज्ञापन बनाने का निर्देश दिया है. लेकिन हमें चिंता यह भी है कि निचली अदालतों में चार हजार से ज्यादा रिक्तियां हैं. यह संख्या हमें परेशान करती है इसे देखना जरूरी है.

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