लक्ष्य से पीछे स्वच्छ भारत मिशन

क्या भारत स्वच्छ भारत मिशन के अनुरूप 2019 तक स्वच्छ हो सकता है? प्रधानमंत्री मोदी द्वारा शुरू किए गए स्वच्छ भारत अभियान अपने लक्ष्य से पीचे चल रहा है. स्वच्छ भारत मिशन के तहत गत वर्ष मार्च 2016 तक 30 फीसदी शहरी कचरा का प्रसंस्करण करने का लक्ष्य तय किया गया था, जबकि इस समय सीमा तक 17.6 फीसदी शहरी कचरे का प्रसंस्करण हो पाया.

इसी अवधि में मिशन का दूसरा लक्ष्य था 50 फीसदी घरों से कूड़ा इकट्ठा करना, जो अपेक्षाकृत बेहतर 42.3 फीसदी हासिल हो पाया.


यह जानकारी सरकार द्वारा संसद में दिए गए जवाबों से हासिल की गई है.

स्वच्छ भारत मिशन का लक्ष्य सिर्फ देश के शहरों की सफाई ही नहीं है, बल्कि कचड़ा कम करना और इसका प्रसंस्करण करना भी है.

चंडीगढ़ अपने 100 फीसदी कचरे का प्रसंस्करण करता है. इसके बाद मेघालय 58 फीसदी कचरे का प्रसंस्करण करता है. दिल्ली का स्तर 52 फीसदी है. चंडीगढ़ में हर घर से कूड़ा इकट्ठा किया जाता है और सड़कों के कूड़े बुहार कर हटाए जाते हैं. इसमें झुग्गी बस्तियां भी आती हैं.

इस कड़ी में सबसे नीचे आने वाले पांच राज्यों में कूड़े का प्रसंस्करण नहीं होता है और इसके किसी जगह ढेर लगा दिया जाता है.

चंडीगढ़ और गोवा में हर घर से कूड़ा इकट्ठा किया जाता है. आंध्र प्रदेश में 90 फीसदी शहरी घरों से कूड़ा इकट्ठा किया जाता है.

विभिन्न शहरों में होने वाली प्रगति पर सरकार का नजर है और वह स्वच्छता रैंकिंग जारी करती है. अभी इस रैंकिंग में मैसूर सबसे ऊपर है. उसके बाद चंडीगढ़ है.

उत्तर प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में सिर्फ तीन ही वार्ड ऐसे हैं, जिनमें कूड़ा इकट्ठा करने की सुविधा है.

राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन द्वारा तैयार स्वच्छता स्थिति रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रीय स्तर पर 64.2 फीसदी शहरी वार्डो में कूड़ा जमा करने के लिए कोई निश्चित स्थान है.

देश के शहरी इलाकों में हर रोज 6.2 करोड़ टन कूड़ा पैदा होता है, जो चीन और अमेरिका के बाद सबसे अधिक है.

नगरपालिकाएं हर रोज में इसमें से 4.5 करोड़ टन कूड़ा बिना प्रसंस्कृत किए ही फेंक देता है, जिससे पर्यावरण प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी समस्या पैदा होती है.

देश में तेजी से आबादी बढ़ रही है और तेजी से औद्योगीकरण और शहरीकरण हो रहा है. ऐसे में राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों के लिए ठोस कचरा प्रबंधन एक प्रमुख चुनौती है.

स्वच्छ भारत मिशन दो अक्टूबर 2014 को महात्मा गांधी जयंती पर शुरू किया गया था और इसके तहत लक्ष्य पूरा करने की समय सीमा 150 गांधी जयंती यानी, 2019 रखी गई है.

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