कश्मीर पर ‘आप’ की नीति क्या है ?

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: कश्मीर पर प्रशांत भूषण के जनमत संग्रह वाले बयान से अरविंद केजरीवील ने असहमति जतायी है. इस प्रकार आम आदमी पार्टी के नेताओं के देश के विभिन्न मुद्दों पर अलग-अलग राय खुलकर सामने आ रही है.

जनलोकपाल आंदोंलन के माध्यम से आपस में जुड़े नेताओं के बीच कई मसलों पर एक राय नहीं है. यह स्वभाविक भी है क्योंकि आम आदमी पार्टी ने जनलोकपाल के नाम पर दिल्ली में चुनाव लड़ा तथा जीता है. इन्होंने दिल्ली के बारें अपना संकल्प पत्र तो तैयार किया था परन्तु ऐसे कई मुद्दें हैं जिन पर पार्टी का कोई घोषित कार्यक्रम नहीं है. इसलिये एक ही मुद्दें पर अलग-अलग राय बारंबार सामने आ रही है.

अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि “जम्मू एवं कश्मीर में सेना की तैनाती आंतरिक सुरक्षा का मामला है. इस मुद्दे पर जनमत संग्रह करने का सवाल ही नहीं उठता.” गौरतलब है कि इससे पहले आम आदमी पार्टी के नेता प्रशांत भूषण ने कहा था कि कश्मीर में सेना की तैनाती पर जनमत संग्रह करवाना चाहियें.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को कहा कि जम्मू एवं कश्मीर में सेना की तैनाती बरकरार रखने के मसले पर जनमत संग्रह कराने का सवाल ही नहीं पैदा होता. लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय लोगों की भावनाओं का हरहाल में सम्मान किया जाना चाहिए. केजरीवाल ने अपनी ही पार्टी के सदस्य प्रशांत भूषण के विचारों से खुद को अलग रखते हुए कहा,

आम आदमी पार्टी के सदस्य प्रशांत भूषण ने कहा था कि जम्मू एवं कश्मीर में अलगाववादियों से निपटने के लिए भारतीय सेना की तैनाती पर निर्णय जनमत संग्रह कराया जाना चाहिए.

केजरीवाल ने हालांकि कहा, “स्थानीय लोगों की इच्छा को ध्यान में रखा जाना चाहिए, अन्यथा यह लोकतंत्र के लिए खतरा होगा. लेकिन हमारी पार्टी किसी तरह के जनमत संग्रह के पक्ष में नहीं है.”

इस घटनाक्रम से यह बात उजागार होती है कि आम आदमी पार्टी का एक घोषित कार्यक्रम होना चाहियें जिसमें कश्मीर, विदेश, आर्थिक, साम्प्रदायिकता नीतियों पर पार्टी का दृष्टिकोण स्पष्ट रहना चाहियें. अन्यथा ऐसी विवाद की स्थिति बनती रहेगी.

ताजा घटनाक्रम में आम आदमी पार्टी के सबसे बड़े नेता तथा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का वरिष्ठ नेता प्रशांत भूषण के साथ मतभेद या विवाद सा लग रहा है जबकि लोकसभा चुनाव लड़ने की घोषणा करने वाले पार्टी के पास कश्मीर पर एक सुस्पष्ट नीति का होना अनिवार्य है.

आम आदमी पार्टी को अपनी सोच को दिल्ली तथा जनलोकपाल के दायरे से आगे ले जाना होगा. इसके बाद ही आम आदमी पार्टी को देशभर में चुनाव लड़ने की योजना बनानी चाहियें. बगैर नीतियों के किसी पार्टी का क्या हश्र होता है यह इतिहास में दर्ज है.

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