कोयला हड़ताल से उत्पादन प्रभावित

नई दिल्ली | एजेंसी: सरकार की नीतियों के खिलाफ चल रहे कोयला हड़ताल का बुधवार को दूसरा दिन है. अब इस बात की आशंका व्यक्त की जा रही है कि इससे पहले कोला उत्पादन फिर बिजली उत्पादन पर असर पड़ेगा. बिना कोयला तथा बिजली के देश का चलना मुश्किल है इसलिये कोयला श्रमिकों की हड़ताल अपने-आप में काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है.इस कोयला हड़ताल में भाजपा से संबंधित बीएमएस भी शामिल है. कोयला क्षेत्र के निजीकरण की प्रक्रिया के विरोध में कोयला श्रमिकों के मंगलवार को पांच दिवसीय हड़ताल पर चले जाने से उत्पादन प्रभावित हुआ. श्रमिक संघों के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि चार दशकों की इस सबसे बड़ी हड़ताल से कई उद्योग प्रभावित होंगे और बिजली कटौती का सामना करना पड़ेगा.

केंद्रीय श्रमिक संघों की घोषणा पर कोयला उत्पादन वाले प्रमुख राज्यों में श्रमिक काम पर नहीं पहुंचे.


खास बात यह कि इस हड़ताल में भारतीय मजदूर संघ, बीएमएस भी हिस्सा ले रही है, जो भारतीय जनता पार्टी से संबंधित है. केंद्र में भाजपा की सरकार है.

कोलकाता में श्रमिक नेता जिबॉन रॉय के अनुमान के मुताबिक हड़ताल के कारण रोजाना 1500 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है.

हड़ताल का कोल इंडिया और उसकी सहायक इकाई के कामकाज पर बुरा असर पड़ा, जो देश में कोयला उत्पादन में 82 फीसदी योगदान करती है.

वाम झुकाव वाले ऑल इंडिया कोल वर्कर्स फेडरेशन के महासचिव रॉय ने कहा, “मंगलवार को कोल इंडिया के एक फीसदी मजदूर भी काम पर नहीं पहुंचे.”

हड़ताल से झारखंड में खास तौर से सेंट्रल कोलफील्ड लिमिटेड, सीसीएल में उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है.

सीसीएल के एक सूत्र ने आईएएनएस से कहा कि कुल 58 कोलियरी में से 39 में उत्पादन शून्य रहा, आठ में आंशिक रहा, जबकि 11 कोलियरी चालू रहे.

सीसीएल रोजाना करीब 1.50 लाख टन कोयले का उत्पादन करती है, लेकिन हड़ताल के कारण 80 फीसदी उत्पादन प्रभावित हुआ.

भारत कोकिंग कोल लिमिटेड, बीसीसीएल में भी उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है और यह 70 फीसदी घट गया.

श्रमिक संघों ने कहा कि कोल इंडिया के विनिवेश के कारण वास्तविक तौर पर कामगारों को गुलामी की स्थिति का सामना करना पड़ेगा.

रॉय ने कहा, “हम विनिवेश नहीं होने देने पर अड़े हुए हैं और चाहते हैं कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अवैध घोषित किए गए कोयला फील्डों को कोल इंडिया को लौटाया जाए.”

बीएमएस सहित इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस, ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस, सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस और हिंद मजदूर संघ ने छह जनवरी की प्रथम पाली से 10 जनवरी की तीसरी पाली तक हड़ताल की घोषणा की है.

ओडिशा में कोल इंडिया का संचालन अवरुद्ध रहा.

कंपनी की एक सहायक इकाई महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड, एमसीएल के प्रवक्ता दिक्के न मेहरा ने कहा, “एमसीएल द्वारा संचालित दोनों कोलफील्ड में कोई उत्पादन या ढुलाई नहीं हो सकी.”

एमसीएल ओडिशा में 15 ओपेन कास्ट और छह भूमिगत खदानों का संचालन करती है.

एमसीएल का दैनिक उत्पादन करीब चार लाख टन है और कंपनी दक्षिण भारत तथा ओडिशा की बिजली कंपनियों को आपूर्ति करती है, जिसमें एनटीपीसी और नाल्को जैसी कंपनियां शामिल हैं.

हड़ताल का हालांकि तेलंगाना की कंपनी सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड, एससीसीएल पर सिर्फ आंशिक असर देखा गया और उत्पादन लगभग सामान्य रहा.

कंपनी के एक प्रवक्ता ने कहा कि हड़ताल का कोई विशेष असर नहीं पड़ा, क्योंकि कंपनी का प्रमुख श्रमिक संगठन, तेलंगाना बोग्गू घानी कर्मिका संघम, बीजीकेएस हड़ताल में हिस्सा नहीं ले रहा है.

कंपनी के महाप्रबंधक एस चंद्रशेखर ने कहा कि सभी खदानें काम कर रही हैं. भूमिगत खदानों में उपस्थिति आंशिक है, लेकिन ओपेन कास्ट खदानों में सामान्य उपस्थिति है.

उन्होंने कहा कि प्रथम पाली में कोयला उत्पादन 50,240 टन और ढुलाई 46 हजार टन हुआ.

उन्होंने कहा कि प्रथम पाली में 34 हजार कर्मचारियों में से 18 हजार उपस्थित हुए. करीब 10 हजार कर्मचारियों ने हड़ताल में हिस्सा लिया है. चंद्रशेखर ने कहा कि 1.5 लाख टन का सामान्य उत्पादन रहने की उम्मीद है.

एससीसीएल तेलंगाना और केंद्र सरकार की संयुक्त उपक्रम कंपनी है. यह कंपनी 15 ओपेन कास्ट और 34 भूमिगत खदानों का संचालन करती है. इस कंपनी के कर्मचारियों की संख्या 59 हजार है.

श्रमिक नेता रॉय ने हालांकि कहा कि एसएससीएल में भी 60 फीसदी श्रमिक काम पर नहीं पहुंचे.

औद्योगिक सूत्रों के मुताबिक हड़ताल से इस्पात, सीमेंट, लोहा जैसे कई क्षेत्र प्रभावित होंगे और बिजली क्षेत्र पर सबसे बुरा असर होगा.

केंद्रीय बिजली प्राधिकरण की निगरानी वाले 100 संयंत्रों में से 20 के पास सिर्फ चार दिनों का कोयला भंडार है. इसलिए हड़ताल के कारण देश के कई हिस्से में बिजली कटौती का सामना करना पड़ सकता है.

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