एक देश में दो सरकार!

रायपुर | अन्वेषा गुप्ता: देश की जनता के सामने दो राजनैतिक दल अपनी नीतियों को अमलीजामा पहनाने के कारण सुर्खियों में हैं. पहला देश की मोदी सरकार तथा दूसरा दिल्ली की केजरीवाल सरकार. मोदी सरकार ने जहां 2014 के लोकसभा चुनावों में प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाई थी वहीं, ‘आप’ की केजरीवाल की सरकार ने हाल ही में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में उसी भाजपा को एक कोने तक सीमित कर दिया है. बात हो रही है इन्ही दोनों पार्टियों के नीतियों की जिनका देश के राजनैतिक भविष्य पर दूरगामी प्रभाव पड़ने वाला है.

मोदी सरकार ने हाल ही में भूमि अधिग्रहण अध्यादेश को संसद में पेश किया है. जिसके बाद से संसद में उसी के सहयोगी दल शिवसेना तथा अकाली भी भूमि अधिग्रहण के पुनीत कार्य से अपने को जुदा दिखाने में मशगूल हैं. भूमि अधिग्रहण आध्यादेश का विरोध करने वालों का कहना है कि इससे कॉर्पोरेट लूट को बढ़ावा मिलेगा. खासकर उस समय जब दुनिया भर के धन्ना सेठों की नज़र अपने खजाने को बढ़ाने के लिये प्राकृतिक संशाधनों पर है.


पिछले कुछ वर्षो से जनता की क्रय क्षमता में आई गिरावट के कारण धन्ना सेठों की नज़र अपनी बिक्री बढ़ाने की बजाये कोशिश है कि जल, भूमि, जंगल, खदान तथा प्राकृतिक तेल के भंडार पर कब्जा कर लिया जाये. जाहिर है कि इससे बिक्री को बढ़ाये बिना संपदा को बढ़ाया जा सकता है.

वहीं, दूसरी ओर, अच्छी खासी संख्या में प्रभावित ग्रामीण तथा आदिवासी इसका विरोध कर रहें हैं. हमारा देश, भारत भी इससे अछूता नहीं है. पिछली सरकार के समय हुए कोयला घोटाला वास्तव में प्राकृतिक संपदा के लूट को सुनिश्चित करने के लिये ही किया गया था.

मोदी सरकार ने भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के माध्यम से उन्हीं धन्ना सेठों द्वारा भूमि अधिग्रहण को उपजाऊ बनाने की कोशिश की है.

बुधवार को एक और राजनीतिक दल का दर्शन देशवासियों के सामने आया है. आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार ने 400 यूनिट तक बिजली का उपयोग करने वाले लोगों का बिजली का बिल मार्च माह से आधा किये जाने का फैसला अपनी कैबिनेट में लिया है.

इसी के साथ दिल्लीवासियों के लिये मुफ्त में पानी उपलब्ध करवाने के लिये भी फैसला लिया है. खासकर, मुफ्त पानी के फैसले को अमलीजामा पहनाने के लिये जमीनी हकीकतों का सामना करना पड़ेगा परन्तु इससे एक नये सरकार का संदेश देश की जनता के सामने गया है.

अब, देश के सामने दो सरकारे हैं जिन्हें जनता गौर से देख परख रही है. देश का राजनीति नक्शा जनता अपने इसी अनुभव के आधार पर बनाये तो आश्चर्य न होगा.

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