नेट निरपेक्षता पर मौन मोदी

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी पर नेट निरपेक्षता के मामले में गहन चुप्पी बरतने का आरोप लगाया. पार्टी ने रविवार को मांग की कि नए उद्यमों के लिए 10 हजार करोड़ रुपये के कोष का इस्तेमाल सामाजिक क्षेत्र के नवोन्मेष में किया जाए. स्टार्ट अप कही जाने वाली उभरती, नया उद्यम शुरू करने वाली कंपनियों के प्रति मोदी की नीतिगत पहल का जिक्र करते हुए कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि उनकी पार्टी ‘प्रधानमंत्री द्वारा की गई एक ऐसी पुनर्खोज का स्वागत करती है जिसे वह हमेशा से मान्यता देती रही थी.’

रमेश ने एक बयान में कहा कि कांग्रेस इस बात पर गर्व महसूस करती है कि उसके शासनकाल में भारत स्टार्टअप के मामले में दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा भागीदार था.


रमेश ने कहा कि स्टार्ट अप शुरू करने वालों के साथ कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की मुलाकातों में यही सामने आया था कि नए उद्यमी नेट निरपेक्षता चाहते हैं.

उन्होंने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कल सरकार द्वारा आयोजित स्टार्ट अप मेगा शो में प्रधानमंत्री नेट निरपेक्षता के लिए प्रतिबद्धता जताने में नाकाम रहे. इस गंभीर मुद्दे पर उनकी चुप्पी गहन थी.”

सरकार द्वारा नए उद्यमियों के लिए 10 हजार करोड़ के कोष पर रमेश ने कहा कि करदाताओं के पैसे से बने ऐसे कोष का इस्तेमाल सस्ती स्वास्थ्य सेवा, कृषि, शिक्षा, प्रौद्योगिकी जैसे सामाजिक प्रभाव डालने वाले क्षेत्रों में किया जाना चाहिए. इन क्षेत्रों को निजी क्षेत्र की पूंजी आसानी से नहीं मिलती.

रमेश ने कहा, “जब गिरते निर्यात, कमजोर घरेलू मांग, टूटते रुपये की वजह से अर्थव्यवस्था बदतर हालत में हो तो यही तार्किक है कि सरकारी धन का इस्तेमाल महत्वपूर्ण सामाजिक क्षेत्रों में किया जाए न कि जोखिम से भरे वेंचर कैपिटल फंड में.”

मोदी ने जिस ‘स्टार्ट-अप इंडिया एक्शन प्लान’ की शुरुआत की है उसमें तीन साल तक उद्यमियों को कर नहीं देना होगा और इन्हें उद्यम पूंजीकोष में निवेश पर पूंजीगत लाभ पर कर में भी छूट दी जाएगी.

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