अंतागढ़ पर चुनाव आयोग पहुंची कांग्रेस

रायपुर | संवाददाता: कांग्रेस पार्टी ने छत्तीसगढ़ के अंतागढ़ में होने वाले उपचुनाव को रद्द करने की मांग की है. कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने मंगलवार को केंद्रीय चुनाव आयोग के दफ्तर जा कर ज्ञापन सौंपा.

इस ज्ञापन में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ विधानसभा की अंतागढ़ विधानसभा सीट के लिये उपचुनाव की प्रक्रिया चल रही है और 13 सितंबर को मतदान होगा. नामांकन के अंतिम दिन कांग्रेस उम्मीदवार मंतूराम पवार और कांग्रेस की डमी प्रत्याशी सविता पवार सहित 14 प्रत्याषियों ने नामांकन दाखिल किया था. स्क्रूटनी के दिन केवल एक प्रत्याशी, कांग्रेस की डमी प्रत्याशी सविता पवार का नामांकन इस बिना पर निरस्त किया गया कि डमी प्रत्याशी द्वारा बी फार्म जमा नहीं किया गया था, जो कि पूरी तरह से गलत था क्योंकि डमी प्रत्याशी के नामांकन को रद्द करने का यह आधार नहीं बनाया जा सकता है.

कांग्रेस नेताओं ने दलील दी है कि नामांकन पत्र का यह निरस्तीकरण चुनाव चिन्ह आरक्षण और आदेष 1968 आबंटन 13 (इ) (ब) (म) और 13 . के प्रावधानों के विपरीत था. हमारे बार-बार आग्रह के बाद कांग्रेस के डमी उम्मीदवार का नामांकन निरस्त कर दिया गया. भारतीय कांग्रेस के डमी प्रत्याशी का नामांकन राज्य की भाजपा सरकार के कहने पर निर्वाचन अधिकारी के द्वारा किया गया.

कांग्रेस ने अपने ज्ञापन में आरोप लगाया है कि पूरा जिला प्रशासन सत्ताधारी दल भाजपा की यूनिट के रूप में काम कर रहा था. कांकेर के पुलिस अधीक्षक ने यह सुनिश्चित किया कि सभी निर्दलीय प्रत्याशियों को इकट्ठा कर निर्वाचन अधिकारी के समक्ष लाकर नामांकन वापसी के लिये मजबूर किया जाये.

चुनाव आयोग को सौंपे गये ज्ञापन में कहा गया है कि भारतीय कांग्रेस के प्रत्याशी के नाम वापस लेने के एक दिन के ही अंदर 10 निर्दलीय प्रत्याशियों के नामांकन वापस करवा लिये गये. बचे दो प्रत्याशियों में, अंबेडकराइट पार्टी के प्रत्याशी के सार्वजनिक रूप से भाजपा के ऊपर जिला प्रशासन और सरकारी मशीनरी का दुरूपयोग कर नाम वापसी के लिये दबाव बनाने का आरोप लगाया. भाजपा ने पूरी सरकारी मशीनरी लगाकर यह कोशिश की कि वाकओवर मिल जाये और चुनाव न हो. सत्ता के इस दुरूपयोग के कारण पूरी प्रजातांत्रिक प्रक्रिया को मखौल बना दिया गया और अंतागढ़ की चुनाव की पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से बोगस हो गयी है.

ज्ञापन में कहा गया है कि कांकेर जिला प्रशासन की मनमानी इसी बात से उजागर हो जाती है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को भी नहीं छोड़ा गया. राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त राजनैतिक पार्टी और प्रमुख विपक्षी दल की राज्य इकाई के अध्यक्ष के रूप में कांकेर में 29 अगस्त की शाम से लेकर 30 अगस्त को सुबह तक उन्हे कांकेर जिला पुलिस द्वारा होटल के कमरे में तक सीमित रख कर नजरबंद रखा गया. जिस होटल में वे रूके थे, उसकी बिजली काट दी गयी. यदि एक मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनैतिक दल के प्रदेश अध्यक्ष के साथ यह सब किया जा सकता है तो सत्ताधारी दल और स्थानीय प्रशासन द्वारा निर्दलीय एवं छोटे राजनैतिक दलों के साथ क्या किया गया, इसका अनुमान लगाया जा सकता है.

कांग्रेस पार्टी ने अपने ज्ञापन में कहा है कि जिन प्रत्याशियों ने नामांकन भरा, उनमें से एक नामांकन निरस्त किया गया और 10 नामांकन वापस करवा लिये गये ताकि भाजपा प्रत्याशी के लिये फील्ड खुला छोड़ दिया गया. यह सब सत्ताधारी के इशारों पर जिला प्रशासन की सक्रिय भागीदारी के साथ संपन्न कराया गया. इन परिस्थितियों में भारत निर्वाचन आयोग से मामले का संज्ञान लेकर चुनाव निरस्त किये जाने और जिला एवं पुलिस प्रशासन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई.

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