जोगी पर कांग्रेस में असंमजस?

रायपुर | जेके कर: क्या कांग्रेस आलाकमान अजीत जोगी को लेकर असंमजस में है? अंतागढ़ टेप कांड के सामने आने के बाद एक माह से भी ज्यादा का समय हो चुका है. 30 दिसंबर 2015 को चुनाव आयोग ने अंतागढ़ टेप की सच्चाई जानने के लिये छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को आदेश दिया था. इसके बाद छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने 6 जनवरी 2016 को मरवाही विधायक अमित जोगी को छः साल के लिये पार्टी से निलंबित कर दिया था तथा अजीत जोगी के निष्कासन का प्रस्ताव अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी को भेज दिया था.

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के इस फैसले पर राज्य के पार्टी अध्यक्ष भूपेश बघेल ने उसी दिन टिप्पणी की थी कि अमित जोगी को पार्टी से निष्कासित किये जाने का लाभ पार्टी को मिलेगा और पार्टी की छवि और निखरेगी. उन्होंने कहा कि पार्टी में कई लोग आये और कई लोग गये. उन्होंने कहा कि “अजीत जोगी के निष्कासन का प्रस्ताव भी बैठक में पारित हुआ है. लेकिन यह अधिकार चूंकि प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पास नहीं है, लिहाजा उनके निष्कासन का प्रस्ताव अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी को भेजा जाएगा.”

जाहिर है कि जोगी पर फैसला लेने की बारी अब कांग्रेस आलाकमान की है. शनिवार को खबर आई कि छत्तीसगढ़ के अंतागढ़ विधानसभा उपचुनाव में कथित फिक्सिंग को लेकर कांग्रेस अनुशासन समिति ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी से जवाब तलब किया है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एके एंटोनी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय अनुशासनात्मक कार्रवाई कमेटी ने दो सप्ताह में अजीत जोगी को स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है.

मतलब ये कि कांग्रेस नेतृत्व में अजीत जोगी को करीब एक माह बाद कारण बताओ नोटिस जारी किया है. इस एक माह के दौरान छत्तीसगढ़ कांग्रेस के जोगी खेमे ने जमकर अपना शक्ति प्रदर्शन किया. जिसका मकसद पार्टी आलाकमान पर दबाव बनाना तथा छत्तीसगढ़ में अपनी जीवंत उपस्थिति का अहसास कराना है.

वहीं कांग्रेस से निष्कासित अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी ने एक बयान जारी करके कहा है कि मीडिया के कुछ मित्रों की जानकारी अगर सही है तो मेरे निष्कासन पर एआईसीसी की अनुशासन समिति के सदस्यों ने छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी से जवाब मांगा है. अनुशासन समिति के सदस्यों ने पीसीसी से पूछा है कि क्यों न वो अमित जोगी का निष्कासन रद्द कर दें. इसके अलावा अनुशासन समिति के सदस्यों ने अजीत जोगी के खिलाफ पीसीसी की अनुशंसा पर जवाब मांगा है.

पिछले माह में अंतागढ़ टेप कांड पर जो भी घटित हो रहा है उससे साफ है कि जिस भाजपा नेतृत्व पर अंतागढ] में ‘चांदी का जूता’ चलाने का आरोप पहले लगाया गया था वह अब मंच से गायब है तथा आरोप लगाने वाली पार्टी कांग्रेस में आपस में सिर फुटव्वल जारी है.

इससे जनता में क्या संदेश जा रहा है? स्पष्ट है कि या तो छत्तीसगढ़ कांग्रेस के संगठन खेमे ने बिना आलाकमान से मशविरा किये जल्दबाजी में जोगी पर फैसला ले लिया है और गेंद आलाकमान के पाले में डाल दिया है. वैसे इस बात की संभावना कम ही नजर आती है कि बिना आलाकमान के हरी झंडी के इतना बड़ा कदम उठाया गया होगा. यदि आलाकमान ने तब ग्रीन सिग्नल दिया था तो अब क्यों असंमजस में है?

इसमें दो मत नहीं कि जनता में संदेश जा रहा है कि कांग्रेस फैसले नहीं ले सकती है. इससे छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को नुकसान ही हो रहा है, फायदा नहीं.

राजनीति के गलियारों में अक्सर कहा जाता रहा है कि जोगी ही छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सबसे बड़ी ताकत है तथा वही उसकी सबसे बड़ी कमजोरी भी हैं. इससे इंकार नहीं किया जा सकता कि जोगी के पास जनाधार भी है तथा समर्पित कार्यकर्ताओं की जुझारू टीम भी है. 2003 में छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार नहीं हुई होती यदि तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने स्व. विद्याचरण शुक्ल को किनारे लगाने की कोशिश में नाराज नहीं किया होता.

साल 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को सत्तारूढ़ भाजपा से मात्र 0.7 फीसदी मत ही कम मिले थे. इससे आने वाले समय में कांग्रेस के फिर से सत्तारूढ़ होने की संभावना बनी हुई है.

इस कारण से कांग्रेस आलाकमान असंमजस में हो सकता है कि ऐसी बलवती संभावनाओं के बीच छत्तीसगढ़ कांग्रेस में कोई बड़ा उलटफेर करना कहीं आगे भारी न पड़ जाये.

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