कांग्रेस का ऐसा हाल क्यों?

नई दिल्ली | विशेष संवाददाता: महाराष्ट्र-हरियाणा विधानसभा चुनावों में कांग्रेस तीसरे-चौथे स्थान पर पहुंच गई है. दोपहर 2.22 बजे तक के रुझानों के अनुसार कांग्रेस, महाराष्ट्र में चौथे स्थान पर है. कांग्रेस 42 तथा राकांपा 43 स्थानों पर आगे है. वहीं, भाजपा 122 तथा शिवसेना 57 सीटों पर आगे है. इसी तरह से हरियाणा में कांग्रेस तीसरे स्थान पर है. कांग्रेस हरियाणा में 14, भाजपा 49 तथा इंडियन लोकदल 19 सीटों है पर आगे है. गौरतलब है कि महाराष्ट्र में 288 तथा हरियाणा में 90 सीटें हैं. इस चुनाव के पहले हरियाणा में कांग्रेस के भूपिंदर सिंह हुड्डा मुख्यमंत्री रहे. ताज्जुब की बात है कि उसी हरियाणा में कांग्रेस तीसरे स्थान पर आगे है. जाहिर सी बात है कि कांग्रेस को लोकसभा चुनाव के समान ही जनता ने ठुकरा दिया है. इन दोनों ही राज्यों में कांग्रेस मुख्य विपक्षी पार्टी नहीं बन सकती है.

कांग्रेस के हार के गंभीर निहितार्थ हैं जिन्हें समझने की जरूरत है. भारत में सबसे ज्यादा समय तक कांग्रेस का शासन रहा है ऐसे में देश की हर खराबी के लिये उसे ही दोषी ठहराया जाता है. वहीं, अपने जीत से उत्साहित भाजपा नेता किरिट सोमैया ने रविवार को कहा, “महाराष्ट्र की जनता ने मोदी जी के सुशासन के एजेंडे में भरोसा दिखाया है. हम महाराष्ट्र की जनता के आभारी हैं.” उन्होंने कहा, “दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के पास हमसे आधी सीट है.”


इससे पहले भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि चुनाव के नतीजे यह दिखाते हैं कि हरियाणा और महाराष्ट्र, दोनों राज्यों में लोगों ने मोदी में विश्वास जताया है. उन्होंने कहा, “परिणाम दर्शाते हैं कि लोग मोदी के नेतृत्व में विश्वास करते हैं.” उन्होंने कहा, “लोगों ने केंद्र में जिस तरह उनके लिए वोट किया, उसी तरह अब वे प्रदेशों में भी उन्हें तलाश रहे हैं.”

जाहिर सी बात है कि कांग्रेस को अपने हार के कारण भाजपा के जीत के कारण में खोजने पड़ेंगे. राजनीति में एक चुनाव हार जाने का अर्थ कदापि भी ऐसा नहीं नहीं है कि जनता ने हमेशा के लिये उसे ठुकरा दिया है. यदि आने वाले समय में जनता को अपनी दुश्वारियों का हल मोदी सरकार से नहीं मिलेगा तो उनके लिये भी आगे का चुनाव जीतना संभव न होगा. फिलहाल भाजपा, अपने विदेशी मोर्चे की सफलता पर इतरा रही है.

मोदी सरकार ने जापान तथा चीन से भारी-भरकम निवेश को आकर्षित किया है. प्रधानमंत्री मोदी की योजना ‘मेक इन इंडिया’ के द्वारा देश को मैनिफैक्चरिंग हब में तब्दील करने की है. इसमें भारत का सबसे बड़ा प्रतिद्वंदी चीन है. इस बात पर भी बहस होनी चाहिये कि विदेशी निवेशों से देश के आम जनता का कितना भला होता है. विदेशी निवेश से यदि देश में बुलेट ट्रेने दौड़ती है तो उसके लिये यात्रियों को अच्छा-खासा पैसा भी चुकाना पड़ेगा. तब जाकर मालूम चलेगा कि बुलेट ट्रेने देश में कितनी सफल रहती हैं.

हम बात कर रहें थे कांग्रेस का यह हाल क्यों हुआ. खैर, उसे तो कांग्रेस पार्टी को ही तय करना पड़ेगा परन्तु इतना साफ है कि मोदी सरकार उन्हीं आर्थिक नीतियों पर चल रहीं हैं जिन पर चल कर कांग्रेस की यह गत हुई है. कांग्रेस ने अपने नीतियों में जनता के बजाये उद्योगपतियों को वरीयता दी थी. जिससे खफ़ा जनता ने उन्हें चलता कर दिया था. रविवार के हरियाणा तथा महाराष्ट्र विधानसभाओं के रुझानों से जाहिर है कि जनता उसे अब तक भूली नहीं नहीं है, जनता ने फिर से कांग्रेस को वक्ती तौर पर ठुकरा दिया है.

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