कांग्रेस की आर्थिक नाकाबंदी आज

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद पहली बार कांग्रेस पार्टी राज्य में आर्थिक नाकाबंदी कर रही है. शुक्रवार की इस नाकाबंदी को लेकर पिछले कई दिनों से कांग्रेस पार्टी तैयारी कर रही थी.

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल, कांग्रेस नेता मोहम्मद अकबर और कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कांग्रेस भवन में पत्रकार वार्ता में कहा कि छत्तीसगढ़ के इतिहास में पहली बार 31 जनवरी शुक्रवार को पूरे राज्य की आर्थिक नाकेबंदी का आंदोलन किया जा रहा है. कांग्रेस धान का 2400 रू. दाम को लेकर आंदोलन 100 से अधिक स्थानो पर कर रही है. आर्थिक नाकेबंदी सभी जिलों और ब्लाक मुख्यालयों में होगी, जहां प्रभारियों ने जिला एवं ब्लाक कांग्रेस की बैठक कर ली है. कांग्रेस ने सभी जिलों और ब्लाकों में आंदोलन की अलग-अलग रणनीति बनाई है.


कांग्रेस नेताओं का कहा कि यह आंदोलन शांतिपूर्ण लेकिन आक्रामक तेवरों के साथ होने जा रहा है. माल का परिवहन एक दिन की आर्थिक नाकेबंदी में बंद रहेगा.
भाजपा सरकार द्वारा 2400 रु. का वादा निभाने से इंकार करने के निर्णय ने किसानों की आर्थिक स्थिति बिगाड़ दी गयी है. एक तो सही दाम नहीं मिल रहा है, दूसरी ओर किसान अपना धान बेचने के लिए भटक रहा है.

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि 2008 से 2013 तक का किसानों से किये गये वादे बलाय ताक रख दिये गये हैं. धान का बकाया बोनस 3880 करोड़ रु.नहीं दिया जा रहा है. सिंचाई पंपों की मुफ्त बिजली का वादा 2008 और 2013 के विधानसभा चुनावों के घोषणा पत्रों में करने के बावजूद भाजपा किसानों से किये गये अपने वायदे को पूरा नहीं कर रही है.

नेताओं ने आरोप लगाया है कि छत्तीसगढ़ में कोयला और पानी प्रचुर मात्रा में होने और सस्ती दरों में उलब्धता के बावजूद घरेलू उपभोक्ताओं और किसानों से बिजली की महंगी दर ली जा रही है और छत्तीसगढ़ के मजदूर किसानों सहित घरेलू बिजली उपभोक्ताओं की आर्थिक स्थिति में हर तरह से रुकावट डालकर संकट उत्पन्न किया जा रहा है. इसको लेकर कांग्रेस ने 11 जनवरी को राज्यव्यापी धरना प्रदर्शन भी किया, जिस पर 20 दिनों में भाजपा सरकार के कानों में जूं तक नहीं रेंगी.

कांग्रेस ने इस यात्रा में जो मांगपत्र तैयार किया है, उसके अनुसार भाजपा के घोषणा-पत्र के अनुसार 2400 रु. प्रति क्विंटल धान की कीमत तुरंत देना शुरु किया जाये, सरकारी धान खरीद में परिवहन, तौल, बारदाना और भुगतान में किसानों को हो रही धान खरीदी को दूर किया जाये, 2008 से 2013 तक बकाया धान के बोनस की राषि 3880 करोड़ रु. किसानों को दी जाये, सिंचाई के पंपों की बिजली मुफ्त दी जाये और पिछले पांच सालों में वसूली गई किसानों के बिजली बिलों की राशि किसानों को लौटाई जाये, बिजली उत्पादन में काम आने वाला कोयला और पानी छत्तीसगढ़ में प्रचुर मात्रा में कम दरों पर उपलब्ध है. इसके बावजूद भाजपा सरकार छत्तीसगढ़ के घरेलू उपभोक्ताओं को बढ़ी दरों पर बिजली खरीदने के लिए मजबूर कर रही है. घरेलू उपभोक्ताओं की बिजली की दरें तत्काल आधी कर जानी चाहिये.

इन मांगों के साथ-साथ आर्थिक नाकेबंदी के इस आंदोलन में छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए केंद्र की कांग्रेस सरकार और कांग्रेस शासित राज्यों की की तरह छत्तीसगढ़ में मजबूत लोकपाल बिल, भ्रष्टाचार के मामलों की जांच बस्तर-सरगुजा के विकास से जुड़ी मांगो सहित मंहगाई रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने पेट्रोल, डीजल पर वेट की दर 25 प्रतिशत से 4 प्रतिशत करने की कांग्रेस पूरजोर मांग करती है.

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