डिग्री बवाल पर मौन पीएम मोदी

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: प्रधानमंत्री की डिग्री पर ‘आप’ ने सवालिया निशान लगा दिये हैं. आम आदमी पार्टी का दावा है कि उनकी डिग्री फर्जी है वहीं भाजपा ने संवाददाता सम्मेलन करके उऩके डिग्रीयों की फोटो कापी बांटी. कांग्रेस प्रारंभ में इस मुद्दे पर शांत थी, लेकिन अब उसने भी कहा कि भाजपा द्वारा जारी दस्तावेज अधिक संदेह पैदा करते हैं. प्रधानमंत्री ने अभी इसपर कोई टिप्पणी नहीं की है.

मामला क्या है
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीए और एमए के अंकपत्रों में नाम अलग-अलग तरीके से लिखा है. यह कोई नहीं जानता कि ऐसा क्यों है. दिल्ली विश्वविद्यालय के ‘स्कूल ऑफ कॉरस्पांडेंस कोर्सेज’ से 17 जुलाई 1975 को बीए (पास) खंड 1 का जो अंकपत्र जारी किया गया है, उसमें उनका नाम ‘नरेंद्र कुमार दामोदरदास मोदी’ है.

इस परीक्षा में मोदी को कुल 400 अंकों में से 165 अंक मिले हैं और वह उत्तीर्ण हैं.

दूसरे साल का अंकपत्र 20 जुलाई, 1976 को जारी किया गया है. इसमें उनका नाम ‘नरेंद्र दामोदरदास मोदी’ है. उन्हें 400 में 121 अंक मिले और फेल घोषित किए गए हैं.

वर्ष 1977 में 26 जुलाई को जो अंक पत्र जारी हुआ, उसमें ‘नरेंद्र कुमार दामोदरदास मोदी’ नाम लिखा हुआ है. दूसरे और तीसरे वर्ष दोनों में यही नाम है. दूसरे वर्ष तीन पत्रों में अनुपस्थित लिखा हुआ है और 1200 अंकों में कुल मिलाकर 367 पाए हैं और अनुत्तीर्ण (फेल) घोषित हैं.

उसी साल की पूरक परीक्षा में उनका नाम ‘नरेंद्र कुमार दामोदरदास मोदी’ है. वह अंकपत्र 12 जनवरी, 1978 को जारी हुआ है. उसमें 1200 अंकों में मोदी को 473 अंक मिले और फिर अनुत्तीर्ण (फेल) घोषित हैं.

17 फरवरी, 1979 को जारी अंकपत्र में उनका नाम ‘नरेंद्र दामोदरदास मोदी’ है और 1200 अंक में 489 मिले हैं और थर्ड डिवीजन से उत्तीर्ण घोषित किए गए हैं.

इसी तरह गुजरात विश्वविद्यालय की एमए प्रथम वर्ष के अंकपत्र में उनका नाम ‘नरेंद्रकुमार दामोदरदास’ है जबकि द्वितीय वर्ष के अंकपत्र में नाम ‘मोदी नरेंद्र दामोदरदास’ है.

हालांकि दिल्ली विश्वविद्यालय (1979) और गुजरात विश्वविद्यालय (1983) दोनों डिग्री में उनका नाम ‘नरेंद्र दामोदरदास मोदी’ है.

भाजपा ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बीए और एमए की डिग्रियां सार्वजनिक कीं और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर आरोप लगाया कि वह प्रधानमंत्री की शैक्षिणिक योग्यता के बारे में झूठ बोल रहे हैं. लेकिन केजरीवाल ने अपनी बात दोहराई और उनकी पार्टी ने मोदी के अंक-पत्रों में कई गड़बड़ियां ढूढ़ कर मीडिया के सामने पेश कर दीं.

भाजपा का दावा
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने संवाददाता सम्मेलन में प्रधानमंत्री को दिल्ली विश्वविद्यालय से मिली स्नातक कला की डिग्री और गुजरात विश्वविद्यालय से मिली स्नातकोत्तर की डिग्री को हाथ में लेकर दिखाया.

शाह ने कहा, “किसी व्यक्ति के निजी जीवन के बारे में आधारहीन आरोप लगाने से पहले उस व्यक्ति को तथ्यों की सत्यता प्रमाणित कर लेनी चाहिए थी. मैं आज यह सोचकर शर्मिदा हूं कि ऐसा दिन भी आएगा कि मुझे प्रधानमंत्री की डिग्रियां सार्वजनिक करनी पड़ेंगी.”

शाह ने भाजपा मुख्यालय में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा जारी बी.ए. की डिग्री और गुजरात विश्वविद्यालय से जारी एम.ए. की डिग्रिया हाथों में लहराते हुए कहा, “केजरीवाल को अब देश से माफी मांगनी चाहिए.”

शाह ने कहा, “बगैर किसी ठोस सबूत के इस मुद्दे को उठाकर केजरीवाल ने राजनीति के स्तर को गिराया है. उन्होंने राष्ट्र को बदनाम करने का पाप किया है.”

जेटली ने केजरीवाल की खिल्ली उड़ाई और कहा कि प्रधानमंत्री के खिलाफ आरोप उस पार्टी ने लगाए हैं, जिसके विधायकों के खिलाफ फर्जी डिग्रियों के लिए मुकदमे चल रहे हैं.

जेटली आप विधायक जीतेंद्र सिंह तोमर का जिक्र कर रहे थे, जिनकी फर्जी डिग्री का खुलासा होने के बाद उन्हें दिल्ली सरकार में मंत्री का पद खोना पड़ा था और उन्हें गिरफ्तार किया गया था. इसके अलावा आप की एक अन्य विधायक भी अपनी शैक्षिक अयोग्यता को लेकर विवादों में है.

‘आप’ का दावा
लेकिन दिल्ली में सत्तासीन आम आदमी पार्टी मोदी की डिग्री के मुद्दे को लगातार जिंदा किए हुए है. आप ने कहा कि शाह और जेटली द्वारा दिखाई गईं डिग्रियां फर्जी हैं.

आप के प्रवक्ता आशुतोष ने सोमवार को कहा, “1975 में जारी बी.ए. की प्रथम वर्ष की अंक तालिका में उनका नाम ‘नरेंद्रकुमार दामोदरदास मोदी’ है, जबकि द्वितीय वर्ष की अंक तालिका में उनका नाम ‘नरेंद्र दामोदरदास मोदी’ तथा तृतीय वर्ष 1977 में उनकी अंक तालिका में उनका नाम ‘नरेंद्र कुमार दामोदर दास मोदी’ है.”

इसी तरह गुजरात विश्वविद्यालय से जारी एम.ए. प्रथम वर्ष के अंक-पत्र पर मोदी नरेंद्र कुमार दामोदरदास लिखा हुआ है, जबकि द्वितीय वर्ष के अंक-पत्र पर मोदी नरेंद्र दामोदरदास नाम लिखा हुआ है.

आशुतोष से सवाल किया, “आपको अपना नाम बदलने के लिए हलफनामा देने की जरूरत पड़ती है. कहां है हलफनामा?

मोदी शब्द की अंग्रेजी की स्पेलिंग में भी एक जगह आई है, तो दूसरी जगह वाई. आशुतोष ने जानना चाहा कि आखिर उपनाम की स्पेलिंग आई से वाई कैसे बदल गई?

आशुतोष ने कहा, “उनकी एम.ए. की डिग्री कहती है कि उन्होंने परास्नातक की पढ़ाई(एंटायर पॉलिटिकल साइंस’ में की है. क्या यह संभव है? प्रमाणपत्रों में ढेर सारी स्पष्ट गड़बड़ियां हैं.”

केजरीवाल का ट्वीट
बाद में केजरीवाल ने एक ट्वीट में कहा कि भाजपा ने शाह-जेटली के संवाददाता सम्मेलन में फर्जी दस्तावेज पेश किए और असली रिकॉर्ड को सील करवा दिया.

केजरीवाल ने जवाब मांगा कि मोदी की बी.ए. की डिग्री से संबंधित ‘असली दस्तावेज’ सील क्यों कर दिए गए हैं.

उन्होंने विश्वविद्यालय से केंद्रीय सूचना आयोग के आदेश को लागू करने का आग्रह किया. सीआईसी ने विश्वविद्यालय से मोदी की बी.ए. की डिग्री को वेबसाइट पर जारी करने को कहा था.

मुख्यमंत्री कहा, “डीयू में दस्तावेज सील कर दिए गए हैं. भाजपा ने पीसी में फर्जी दस्तावेज दिखाए और असली रिकॉर्ड्स सील कर दिए. क्यों? सीआईसी का आदेश लागू करें. जांच की अनुमति दें.”

जेटली का जवाब
जेटली ने कहा कि मोदी ने अपनी पढ़ाई कठिन परिस्थितियों में की थी और बी.ए. की परीक्षा देने के लिए वह गुजरात से दिल्ली आए थे, जहां वह एबीवीपी के कार्यालय में रुके थे.

जेटली ने कहा, “जो लोग आम आदमी होने का दावा करते हैं उन्हें कम से कम प्रधानमंत्री की प्रशंसा करनी चाहिए. इससे बड़ा आम आदमी का कोई और उदाहरण नहीं हो सकता.”

मोदी ने दिल्ली विश्वविद्यालय कॉलेज ऑफ करेस्पांडेंस कार्सेस में 1975 में एक बी.ए. (पास) विद्यार्थी के रूप में नामांकन कराया था. यह देश में आपातकाल का समय था, और मोदी ने उसके खिलाफ आंदोलन किया था. (एजेंसी इनपुट के आधार पर)

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