चिंता मिटाने का नया तरीका खोजा

रॉकविले | एजेंसी: वैंडरबिल्ट विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों को चिंता मिटाने के एक नए संभावित तरीके का पता चला है, जिसका पेट और हृदय पर कोई बुरा प्रभाव नहीं होगा. चूहे पर किए गए एक प्रयोग से इस संभावित तरीके का पता चला है.

विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने देखा कि सीओएक्स-2 एंजाइम को रासायनिक संवर्धित इनहिबिटर चूहों में प्राकृतिक एंडोकैनाबिनॉयड को उत्तेजित कर उसकी चिंताएं दूर करता है. और इस प्रक्रिया में चूहों के जठरांत्र पर कोई बुरा असर भी नहीं हुआ.


वैज्ञानिकों का यह शोध आगामी रविवार को शोध पत्रिका ‘नेचर न्यूरोसाइंस’ के ऑनलाइन संस्करण में प्रकाशित होगा.

एंडोकैनाबिनॉयड स्वाभाविक संकेत देने वाले अणु हैं, जो मस्तिष्क में कैनाबिनॉयड संग्राहक को सक्रिय कर देता है. इसी कैनाबिनॉयड संग्राहक को चरस के सक्रिय तत्व से भी सक्रिय होते हुए पाया गया.

यह संग्राहक जठरांत्रीय प्रणाली और शरीर के अन्य हिस्सों में भी पाया जाता है, और इसके प्रमाण मिले हैं कि ये कई शारीरिक और मानसिक प्रक्रियाओं तथा तनाव या व्यग्रता दूर करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं.

विज्ञान पत्रिका ‘साइंस डेली’ के मुताबिक वैज्ञानिकों ने रविवार को प्रकाशित होने वाली अपनी रपट में शोध का निष्कर्ष निकालते हुए लिखा है कि यदि विश्वविद्यालय में तैयार सीओएक्स-2 इनहिबिटर का यही प्रभाव मानवों पर भी होता है, तो चिंता का इलाज करने के तरीके को एक नई दिशा मिल सकती है.

इससे दर्द निवारण और कोलन कैंसर के इलाज को भी एक नई दिशा मिल सकती है.

विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर और वैंडरबिल्ट इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल बायोलॉजी के पीएच.डी. निदेशक और शोध रपट के एक वरिष्ठ सह लेखक लॉरेंस मार्नेट और कैंसर शोध के प्रोफसर मैरी गेड्डेस स्टालमैन ने कहा कि चूंकि विश्वविद्यालय में तैयार इस पदार्थ से चूहों में प्रोस्टाग्लैंडीन उत्पादन बाधित हुए बिना एंडोकैनाबिनॉयड का स्तर बढ़ गया, इसलिए हमारा मानना है कि इससे जठरांत्रीय या हृदयवाहिनी पर कोई कुप्रभाव नहीं होगा, जो एस्पिरीन या अन्य गैर-स्टेरॉयडल सूजनरहित दवाओं से होता है.

मार्नेट ने कहा कि यदि इस दिशा में ठोस प्रमाण मिलते हैं, तो भी रोगियों पर इस खोज पर आधारित दवाओं के प्रयोग में अभी कई वर्ष लगेंगे.

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