इलाज के अभाव में जवान की मौत

पटना | एजेंसी: एक ओर बिहार सरकार राज्य में लोकसभा चुनाव को लेकर पुख्ता सुरक्षा-व्यवस्था का दावा कर रही है वहीं राज्य में सुरक्षाकर्मी ही इलाज के इंतजार में तड़प-तड़प कर मौत को गले लगा रहे हैं.

ताजा मामला सोमवार को औरंगाबाद में बारूदी सुरंग विस्फोट में घायल केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के डिप्टी कमांडेंट इंद्रजीत सिंह का है जो कि रो-रोकर अपनी जिंदगी के लिए भीख मांगते रहे, फिर भी उन्हें इलाज नहीं मिला. और बाद में सिंह की इलाज के दौरान रांची में मौत हो गई.

औरंगाबाद जिले के ढिबरा थाना क्षेत्र में बरंडा मोड़ के पास भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की ओर से लगाए गए बारूदी सुरंग के निष्क्रिय करने के दौरान हुए विस्फोट में सीआरपीएफ के दो जवान और एक डिप्टी कमांडेंट की मौत हो गई.

घटना के बाद प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि घटनास्थल पर दो घंटे तक कोई चिकित्सक नहीं पहुंचा, जिसके कारण घायल जवानों की हालत गंभीर हो गई. घायलावस्था में डिप्टी कमांडेंट ने अपने अंतिम वाक्य में कहा था, “मेरे शरीर का सारा खून निकल गया है रे भाई. 10 मिनट में मर जाऊंगा. मेरे छोटे-छोटे बच्चे हैं, मुझे कोई बचा लो भाई.”

इंद्रजीत के परिजनों का आरोप है कि समय पर इलाज मुहैया नहीं कराया गया. अगर समय पर इलाज मिलता तो वह आज हम लोगों के बीच होते.

औरंगाबाद के पुलिस अधीक्षक उपेन्द्र शर्मा कहते हैं कि विस्फोट में सीआरपीएफ के जवान राजस्थान निवासी पवन कुमार एवं आंध्र प्रदेश निवासी टी़ पन्ना राव की मौके की मौत हो गई थी, जबकि पटना के मनेर निवासी डिप्टी कमांडेंट इंद्रजीत सिंह की मौत रांची इलाज के दौरान हो गई. उन्होंने बताया कि इस घटना में सभी घायलों को इलाज के लिए ले जाया गया और रांची रेफर कर दिया गया.

वैसे औरंगाबाद में यह कोई पहली नक्सली घटना नहीं है. इसके पूर्व सात अक्टूबर 2013 को नक्सलियों ने खुदवां में बारूदी सुरंग विस्फोट कर सात लोगों को उड़ा दिया था. पिछले वर्ष 17 जुलाई को गोह में सड़क निर्माण कंपनी के बेस कैम्प पर हमला कर नक्सलियों ने पांच लोगों की हत्या कर दी थी. इसके अलावा विद्यालय भवन और टेलीफोन टॉवर उड़ाने की कई वारदातों को नक्सली अंजाम दे चुके हैं.

उल्लेखनीय है कि 10 अप्रैल को बिहार में प्रथम चरण के लोकसभा चुनाव के तहत औरंगाबाद संसदीय क्षेत्र में मतदान होना है.

बिहार के मुख्य सचिव अशोक कुमार सिन्हा ने सोमवार को पटना में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि गुरुवार को बिहार में आठ जिलों के छह लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों में प्रथम चरण का मतदान स्वच्छ, निष्पक्ष, भयमुक्त वातावरण में कराने के लिए व्यापक प्रबंध किए गए हैं.

उनका कहना है कि सभी मतदान केंद्रों पर सशस्त्र सैन्य बल की तैनाती की जाएगी. लेकिन सोमवार की घटना से यह साबित हो गया है कि औरंगाबाद में शांतिपूर्ण मतदान पुलिस प्रशासन के लिए एक चुनौती है.

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