चोरी रोकने कैमरे वाली बिलिंग मशीन

रायपुर | समाचार डेस्क: छत्तीसगढ़ में बिजली चोरी रोकने कैमरे वाली स्पाट बिलिंग मशीन से रीडिंग ली जायेगी. इतना ही नहीं बिजली की खपत का बिल बनाने वालों के मशीन में जीपीएस भी लगा होगा जिससे पता चल जायेगा कि मौके पर जाकर ही बिल बनाया गया है. छत्तीसगढ़ बिजली वितरण कंपनी के कार्यपालक निदेशक एमएल मिश्रा ने कहा कि चांपा के बाद इस व्यवस्था को पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में लागू करने की तैयारी की जा रही है.

उन्होंने कहा कि इसके लिये टेंडर निकाला जायेगा जिसमें कुछ समय लगेगा. उऩके अनुसार इस नई व्यवस्था से रीडिंग और बिलिंग की गड़बड़ी पर रोक लगाया जा सकेगा.


उल्लेखनीय है कि यह व्यवस्था वर्तमान में छत्तीसगढ़ के चांपा-जांजगीर में लागू है. इसके तहत रीडर को मीटर की रीडिंग लेने के साथ ही उसका फोटो भी खींचना पड़ता है जो सीधे छत्तीसगढ़ बिजली वितरण कंपनी के सर्वर में चला जाता है. जहां इस बात की जांचकर ली जाती है कि जो रीडिंग है उसी का बिलिंग हुआ है.

दरअसल, प्रतिमाह 200 यूनिट से कम खफत होने पर 3.60 रुपये की दर से बिलिंग होती है और यदि वह 200 से 20-25 यूनिट ज्यादा हो तो उसे 5.20 रुपये की दर से भुगतान करना पड़ता है. इसलिये प्रति यूनिट 1.60 रुपये की बचत करने के लिये उस रीडिंग को कम करके बताया जाता है. जिससे 200 यूनिट की खपत पर 360 रुपये प्रतिमाह बच जाते हैं.

छत्तीसगढ़ में बिजली के 35.77 लाख उपभोक्ता हैं जिनमें से 15.60 लाख बीपीएल तथा 20.17 लाख आम उपभोक्ता हैं.

गौरतलब है कि बिजली की चोरी करने के लिये मीटर में रजिस्टेंट लगा दिया जाता है जिससे रीडिंग कम आती है. साल 2013 में छत्तीसगढ़ बिजली वितरण कंपनी ने ऐसे कई मामले रायपुर तथा दुर्ग में पकड़े थे.

बिजली चोरी के आधुनिक औजार
जैमरः चोरी की सबसे नई तकनीक है जैमर. यह एक ऐसा उपकरण है जिसे मीटर के पास ऑन करके लगा दिया जाता है, इसके लगते ही मीटर को फ्रीक्वेंसी मिलना बंद हो जाती है और मीटर घूमना बंद हो जाता है. मीटर की जांच के दौरान इसे आसानी से हटाया जा सकता है इसलिए पकड़े जाने की संभावना नहीं के बराबर. जैमर के हटाने पर मीटर पहले की तरह चलने लगता है. बाजार में यह 4,000 से 15,000 रु. में खास दुकानों में उपलब्ध है.

शक्तिशाली चुंबकः मीटर के नीचे चुंबक रख देने से मीटर बंद हो जाता है. इसके लिए बाजार में बड़े आकार के चुंबक उपलब्ध हैं और इनकी कीमत 6,000 से 8,000 रु. है. इलेक्ट्रॉनिक मीटर लग जाने से चुंबक का इस्तेमाल कम हो गया है.

स्पार्क गनः स्पार्क गन यानी दुपहिया वाहन के प्लग के स्पार्क से जिस तरह करंट निकलता है उसी तरह का करंट स्पार्क गन निकलता है जिससे मीटर चलना बंद हो जाता है. स्पार्क गन से 35 केवीए क्षमता का मीटर बंद हो जाता है, कीमत है 3,000-4,000 रु.

रिमोटः इसमें मीटर के भीतर एक चिप डाली जाती है. इलेक्ट्रॉनिक मीटर में यह विभाग के लोगों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं. इसका फायदा यह है कि जब चाहे तब रिमोट से मीटर बंद कर दो और बिजली विभाग के कर्मचारी जब मीटर रीडिंग करने के लिये आयें तो रिमोट से मीटर चालू कर दो.

बाईपासः बाईपास यानी मीटर को जोड़ने वाली तार से लाइन खींचकर बिजली चोरी. इससे मीटर घूमना बंद हो जाता है. राज्‍य में पिछले एक साल में मीटर बाईपास के 186 मामले पकड़े गये हैं.

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