दाल-भात योजना ने दम तोड़ा

रायपुर: छत्तीसगढ़ में रमन सिंह की सरकार द्वारा लागू की गई शुरुआती योजनाओं में से एक दाल-भात केंद्र योजना ने दम तोड़ दिया है. रमन सिंह द्वारा सत्ता में आते ही सबसे पहले शुरु की गई दाल-भात योजना में से अब केवल 133 केंद्र ही अस्तित्व में बचे हैं. दिलचस्प ये है कि इन दाल-भात केंद्रो को 6.25 रुपये प्रतिकिलो की दर से चावल कल्याणकारी संस्थाओं हेतु भारत सरकार से प्राप्त आवंटन में से प्रदाय किया जाता है और योजना की शुरुवात से आज तक कभी इस योजना में दाल का प्रावधान ही नहीं किया गया.

विधानसभा में यह राज्य के खाद्य मंत्री पुन्नूलाल मोहले ने खोला. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इसमें योगदान नहीं करती. इस साल जनवरी में 2262 क्विंटल चावल अन्नपूर्णा दालभात केंद्रों हेतु दिया गया है. मोहले ने एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि सरकार ने पिछले 9 सालों में अब तक शिकायत के आधार पर केवल 74 लोगों के राशन कार्ड ही निरस्त किये हैं.


एक सवाल के जवाब में पुन्नूलाल मोहले ने बताया कि एपीएल योजना के तहत 2004 से अब तक 22.38 लाख लोगों को राशनकार्ड जारी किया गया है. इसी तरह मुख्यमंत्री खाद्यान सहायता योजना के 29.42 लाख राशन कार्ड और अंत्योदय योजना के तहत 8.19 लाख राशनकार्ड जारी किये गये हैं. मोहले ने कहा कि राज्य के 16.90 लाख एपीएल, 11.56 लाख बीपीएल और 7.19 लाख अंत्योदय परिवारों हेतु केंद्र सरकार द्वारा खाद्यान का स्थायी आवंटन जारी किया जाता है.

पुन्नूलाल मोहले ने कहा कि राज्य के 27 जिलों में से कुल 16 जिलों में ही उपभोक्ता फोरम कार्यालय कार्यरत हैं और इनमें 3163 मामले लंबित हैं. आज की तारीख में रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, सरगुजा, जगदलपुर, रायगढ़ और कोरिया जिलों में ही पूर्णकालिक पीठासीन अधिकारी हैं.

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