दलाई लामा ने की विश्वशांति की कामना

रायपुर | संवाददाता: बौद्ध धर्मगुरू ने एक बार फिर से दुनिया के हथियारमुक्त होने की कामना की है. तिब्बत की निर्वासित सरकार के प्रमुख और विश्व शांति के लिए नोबल पुरस्कार से सम्मानित दलाईलामा ने कहा कि बीसवीं शताब्दी का इतिहास युद्ध और हिंसक घटनाओं से भरा हुआ है, लेकिन मेरी कामना है कि हमारी यह इक्कीसवीं विनाशकारी आधुनिक हथियारों से मुक्त होकर युद्ध विहीन हो, ताकि चारों दिशाओं में शांति और सदभावना का वातावरण निर्मित हो सके और एक शांतिपूर्ण खुशहाल दुनिया बन सके. उन्होंने कहा कि इसके लिए हमें अपने विचारों में परिवर्तन लाना होगा.

दलाईलामा तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ प्रवास के दूसरे दिन सिरपुर में छात्र-छात्राओं के बीच व्याख्यान दे रहे थे. उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता और अहिंसा भारत की हजारों वर्ष पुरानी परम्परा है, जो आज भी दूसरे देशों के लिए प्रेरणादायक है.

दलाईलामा ने कहा कि दुनिया में कहीं भी रहें, समय हमेशा बदलता रहता है. जैसे बीसवीं शताब्दी बीत चुकी है. अब हम इक्कीसवीं शताब्दी में हैं. यह इक्कीसवीं सदी का प्रारंभिक दौर है. मैं तो बीसवीं शताब्दी का व्यक्ति हूं, लेकिन हमारे युवाओं से मैं हमेशा यह आव्हान करता हूं कि जो शताब्दी बीत चुकी है, उसे भूलकर अब हमें इक्कीसवीं शताब्दी को यादगार बनाना है. इसके लिए हमें परस्पर प्रेम, दया, करूणा और अहिंसा के मार्ग पर चलना होगा.

दलाईलामा ने कहा कि इक्कीसवीं सदी को हम युद्ध विहीन सदी के रूप में विकसित करके एक शांतिपूर्ण और सुन्दर दुनिया की रचना कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि नोबल पुरस्कार मिलने के बावजूद मैं आज भी एक सामान्य बौद्ध भिक्षु हूं. दुनिया में शांति और सदभावना कायम रहे इसके लिए मैं जीवन भर काम करता रहूंगा.

दलाईलामा ने सिरपुर से लगभग 18 किलोमीटर पर पहाड़ी में स्थित एक प्राचीन और प्राकृतिक गुफा ध्यान लगाकर देश और दुनिया में शांति और सभी लोगों के लिए खुशहाली की कामना की. उन्होंने कहा कि इस प्राचीन गुफा का प्राकृतिक सौन्दर्य अनोखा है. यहां आकर मुझे आत्मिक शांति और प्रसन्नता हो रही है.

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