राफेल के सवाल

सुदीप ठाकुर | फेसबुक: अविश्वास प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री मोदी के जवाब के बावजूद राफेल सौदे को लेकर अनेक सवाल अनुत्तरित रह गए हैं, उनके जवाब जानना जरूरी है, क्योंकि यह देश की सुरक्षा और साख से जुड़ा मामला है:

1. संसद में बहस के दौरान फ्रांस का बयान आना, क्या देश की संप्रभुता का हनन नहीं है?


2. बहस के दौरान दो घंटे के भीतर ही फ्रांस ने बयान कैसे जारी किया?

3. फ्रांस का यह बयान स्वस्फूर्थ था या फिर सरकार के स्तर पर उससे संपर्क किया गया था?

4. रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद के भीतर जो पत्र लहराया, क्या वह अपने साथ लेकर संसद के भीतर आई थीं या वह पत्र उन्हें बाद में संसद में मुहैया कराया गया?

5. रक्षा मंत्री ने जो पत्र दिखाया, वह 2008 के समय यूपीए सरकार और फ्रांस की सरकार के समय का था। क्या दोनों देशों में उसके बाद बनी नई सरकारों ने इस समझौते को वैसे ही जारी रखा, क्या उसके अनुमोदन की जरूरत थी और यदि थी तो क्या ऐसा किया गया था?

6. क्या राहुल गांधी ने संसद के भीतर झूठ बोला?

7. देश की सुरक्षा से जुड़े अहम मामले में यदि कोई सदस्य संसद के भीतर गलतबयानी करे, तो उसके खिलाफ किस तरह की कार्रवाई के प्रावधान हैं और क्या सरकार राहुल गांधी के खिलाफ वह कार्रवाई करने जा रही है?

8. राहुल गांधी ने कहा कि उनसे फ्रांस के राष्ट्रपति ने खुद कहा था कि रक्षा सौदों की जानकारी सार्वजनिक न किए जाने को लेकर दोनों देशों के बीच किसी तरह का समझौता नहीं हुआ है और वह पूरे देश को यह बता सकते हैं। यह भी बताया गया है कि इस मुलाकात के समय पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और आनंद शर्मा भी मौजूद थे। यह मुलाकात किस हैसियत से की गई थी? सामान्य तौर पर विदेशी शासनाध्यक्ष भारत आने पर विपक्षी नेताओं से भी मिलते हैं। क्या यह मुलाकात उसी तरह की थी?

9. राहुल को बताना चाहिए कि उनके पास क्या इस मुलाकात और फ्रांसीसी राष्ट्रपति के साथ उनकी बातचीत का कोई प्रमाण है या नहीं, क्योंकि उन्होंने सरकार पर बहुत ही गंभीर आरोप लगाए हैं।

10. क्या राहुल सिर्फ कांग्रेस और यूपीए पर लगने वाले भ्रष्टाचार के आरोपों के जवाब के रूप में ही यह आरोप लगा रहे हैं या वाकई उनके पास कुछ ठोस सबूत भी हैं? और यदि उनके पास सबूत हैं, तो उसे वह सार्वजनिक क्यों नहीं करते?

11. सरकार ने पारदर्शिता की बात की है, लेकिन उसे बताना चाहिए कि क्या राहुल और फ्रांसीसी राष्ट्रपति की मुलाकात की उसे कोई जानकारी थी या नहीं?

12. फ्रांस ने जो स्पष्टीकरण जारी किया, उसमें राहुल से मेक्रों की मुलाकात का जिक्र नहीं है। क्या फ्रांस से इस मुलाकात के संबंध में नहीं पूछा जाना चाहिए? क्या फ्रांस इस सौदे को लेकर कुछ छिपा रहा है?

13. यदि सरकार गलत हो तो वह और राहुल गांधी गलत हों तो वह क्या देश से माफी मांगेंगे?

रक्षा सौदों को लेकर पहले भी आरोप लगते रहे हैं, जिससे देश की साख पर आंच आई है। बोफोर्स मामले में देश ने देखा है कि उस पर कई दशकों तक राजनीति हुई, सरकार तक गिर गई, लेकिन उसका असली सच कभी सामने नहीं आ सका। उस मामले में किसी को सजा तक नहीं है। वास्तव में राहुल और फ्रांसीसी राष्ट्र्रपति की मुलाकात के बारे में जानना जरूरी है, क्योंकि कांग्रेस अध्यक्ष के आरोप का यही सबसे बड़ा आधार है। सरकार को चाहिए कि वह अपने स्तर पर इस मुलाकात से जुड़े तथ्यों और ब्यौरों को सार्वजनिक करे। राहुल को भी चाहिए कि वह सिर्फ हिट ऐंड रन की शैली में आरोप न लगाएं, बल्कि उन्हें ठोस सबूत सामने रखने चाहिए।

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