छत्तीसगढ़ में बच्चों के लिए नशा मुक्ति केंद्र

रायपुर | एजेंसी: छत्तीसगढ़ के रायपुर में नशे की लत से बच्चों को छुटकारा दिलाने के लिए देश का पहला नशा मुक्ति केंद्र खोलने की तैयारी अंतिम चरण में है. यह पूरी तरह से केवल बच्चों के लिए ही होगा. जिला महिला एवं बाल विकास विभाग शहर के एक एनजीओ से इस केंद्र का संचालन कराएगा. इस माह के अंत तक केंद्र को शुरू किया जा सकता है. जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी एसके चौबे का कहना है कि एक साल पहले पास हुए प्रस्ताव के आधार पर केवल बच्चों के लिए ही नशा मुक्ति केंद्र खुलने जा रहा है. इसमें शहर के एक गैर सरकारी संगठन की मदद ली जा रही है. गैर सरकारी संगठन ही उसका संचालन करेगा, क्योंकि सर्व शिक्षा अभियान के तहत घुमंतू बच्चों के लिए शहर में हॉस्टल चल रहे हैं, इस कारण आय गृह और पालिका गृह बनाने की जरूरत नहीं है.

जिला महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला बाल संरक्षण समिति की बैठक पिछले वर्ष दो जुलाई को हुई थी. उसमें शंकरनगर स्थित संकल्प गैर सरकारी संगठन ने स्टेशन और शहर में कहीं भी नशा करने वाले बच्चों के लिए नशा-मुक्ति केंद्र शुरू करने का प्रस्ताव रखा था.


समिति ने इस प्रस्ताव को पास कर दिया था. लगभग एक वर्ष की तैयारी के बाद अब यह केंद्र इसी माह 26 तारीख को खोलने की तैयारी है. क्योंकि यह दिन इंटरनेशनल डे अगेंस्ट ड्रग अब्यूस एंड लिसिट ट्रैफिकिंग है. इस केंद्र के शुरू होने के बाद नशे की गिरफ्त में फंसे बच्चों को नशीली चीजों से छुटकारे में मदद के लिए जगह मिल पाएगी.

राजधानी में संकल्प गैर सरकारी संगठन के संचालक मनीषा शर्मा की माने तो यह देश का पहला ऐसा नशा मुक्ति केंद्र होगा, जहां केवल बच्चों को रखा जाएगा. इस माह के अंत तक इसे शुरू करने की तैयारी है. बच्चों को नशे से मुक्ति दिलाने के लिए विशेष कोर्स होगा. दवाइयां दी जाएंगी, जो नि:शुल्क होंगी. रजिस्ट्रेशन शुल्क पर अभी केवल विचार चल रहा है.

बच्चों का नशा मुक्ति केंद्र खोलने वाले गैर सरकारी संगठन ने नशे के आदी बच्चों का सर्वे कराया है. गैर सरकारी संगठन संचालक के मुताबिक केवल स्टेशन में ही लगभग 500 बच्चे नशा करते देखे गए हैं. गली-मोहल्लों और झुग्गियों में भी नशा करने वाले बच्चों की संख्या काफी ज्यादा है.

गैर सरकारी संगठन संचालक ने बताया कि बच्चों में नशे की लत छुड़ाने के लिए तीन माह का कोर्स बनाया गया है. उन्हें नशे के खिलाफ जागरूक करने के लिए ट्यूटर होंगे, जो बच्चों को नशे से होने वाले दुष्परिणामों के बारे में बताएंगे. बच्चों के लिए दवाओं की व्यवस्था रहेगी. उनकी काउंसिलिंग कराई जाएगी. इस तरह वर्ष में चार बैच में कोर्स होगा. एक वर्ष में 100 बच्चों को केंद्र में लाकर नशे की लत छुड़ाने का लक्ष्य रखा गया है.

गैर सरकारी संगठन जिन बच्चों को कोर्स कराएगा, उनसे सौ रुपये रजिस्ट्रेशन शुल्क लेने पर विचार चल रहा है. इस संदर्भ में गैर सरकारी संगठन संचालक का कहना है कि अगर परिजन बच्चों को लेकर आएंगे, तब शुल्क लिया जाएगा. इससे परिजनों में गंभीरता रहेगी. जो बच्चे घूमंतू होंगे, जिनके परिजन नहीं होंगे, उनसे शुल्क नहीं लिया जाएगा.

सर्व शिक्षा अभियान के परियोजना अधिकारी एके सारस्वत ने बताया कि विभाग के शहर में चार हॉस्टल हैं. वहीं घुमंतू बच्चों को लाकर रखा जाता है. उनके लिए स्कूल में शिक्षा की व्यवस्था भी कराई जाती है.

जिला बाल संरक्षण समिति की बैठक में घुमंतू बच्चों के लिए आय और पालिका गृह भी बनाने का प्रस्ताव पास हुआ था. दोनों प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चले गए हैं. इसे शुरू करने के लिए निर्माण एजेंसी नहीं तलाशी जा सकी है. इन दोनों गृहों में बच्चों के रहने की व्यवस्था की जानी है.

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