सैप्टिक, सीवर में होने वाली मौत में छत्तीसगढ़ नंबर 2

रायपुर | संवाददाता: सैप्टिक टैंक या सीवर में होने वाली मौत के मामले में दिल्ली देश में नंबर 1 पर है तो छत्तीसगढ़ इस मामले में दूसरे नंबर पर है. पिछले दो सालों के आंकड़े तो यही बताते हैं.

सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने हाथ से मैला उठाने वालों की मौत से संबंधित एक रिपोर्ट में बताया है कि छत्तीसगढ़ में 2017 में 4 लोगों की मौत हुई थी. वहीं 2018 में मरने वालों की संख्या 5 थी.


4 लोगों की मौत की घटना राज्य के सूरजपुर में अगस्त 2017 में हुई थी, जबकि 2018 में जशपुर में 5 लोग मारे गये थे.

दिल्ली में इन दो सालों में 13 लोग मारे गये थे. इस तरह की मौत के मामले में दिल्ली पिछले दो सालों में शीर्ष पर है.

आंकड़ों को देखें तो इस मामले में मध्यप्रदेश की स्थिति कहीं बेहतर है. मध्यप्रदेश में 1993 से 2019 तक केवल 14 लोगों की इस तरह मौत हुई है.

सुप्रीम कोर्ट ने 2003 की सिविल रिट याचिका क्रमांक 583 में 27 मार्च 2014 को जो निर्णय दिया था, उसके अनुसार ऐसे मामलों में प्रत्येक पीड़ित के परिवार के सदस्यों को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने का प्रावधान है.

इसके साथ-साथ ‘हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों के नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम 2013’ के उपबंधों के अनुसार व्यक्तियों या एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिये भी सरकार को भेजे जाने का कानून है.

यहां तक कि 1993 से ऐसे किसी भी मामले में हुई मौत के लिये मुआवजा दिये जाने के लिये ऐसे लोगों का नाम पता लगाने का भी सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट निर्णय है.

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