दिल्ली गैंगरेप: दो की फांसी पर रोक

नई दिल्ली | एजेंसी: दिल्ली गैंगरेप मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के मृत्युदंड बरकरार रखने वाले फैसले पर रोक लगाई है. मामले के दो दोषियों ने शीर्ष अदालत में गुरुवार को सुनाए गए फैसले को चुनौती दी है.

मामले में दोषी ठहराए गए पवन गुप्ता और मुकेश ने उल्लेख किया है कि ‘रोजाना सुनवाई के तहत वे निष्पक्ष सुनवाई से वंचित रहे और उन्हें अभियोजन पक्ष के मनगढंत और तथ्यों के विपरीत कहानी को स्वीकार करने पर मजबूर किया गया.’

दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार को मामले के चार दोषियों को निचली अदालत से मिली मौत की सजा को बरकरार रखा. उच्च न्यायालय ने कहा कि इनका ‘बर्बर’ कृत्य ‘मानवीय दया’ के योग्य नहीं है और ‘इस तरह के घिनौने व्यवहार’ का समाज मूकदर्शक बना नहीं रह सकता है.

न्यायमूर्ति रेवा खेत्रपाल और न्यायमूर्ति प्रतिभा रानी की खंडपीठ ने चारों दोषियों मुकेश (26), अक्षय ठाकुर (28), पवन गुप्ता (19) और विनय शर्मा (20) की अपील ठुकरा दी. निचली अदालत ने चारों को 13 सितंबर 2013 को मौत की सजा सुनाई थी.

16 दिसंबर, 2012 को दक्षिणी दिल्ली में चलती बस में एक प्रशिक्षु फीजियोथेरेपिस्ट ज्योति सिंह पांडे के साथ छह लोगों ने सामूहिक दुष्कर्म किया और पीड़िता को अमानवीय यातनाएं दीं जिससे बाद में उसकी मौत हो गई. आरोपियों ने पीड़िता और उसके पुरुष साथी को सर्दियों की रात में वस्त्रहीन हालत में सड़क पर फेंक दिया और भाग निकले.

बाद में पीड़िता को इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया जहां माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में 29 दिसंबर 2012 को उसकी मौत हो गई. मामले में त्वरित अदालत ने चार दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी जिस पर उच्च न्यायालय से पुष्टि होनी थी.

पीड़िता के साथ दुष्कर्म करने वाले छह लोगों में एक किशोर भी शामिल था जिसे 31 अगस्त 2013 को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने तीन वर्षो के लिए सुधार गृह भेज दिया. जुवेनाइल कानून के तहत यह अधिकतम सजा है. आरोपियों में से एक दिल्ली के तिहाड़ जेल में मृत पाया गया.

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