दिल्ली सरकार पर आप-भाजपा में ठनी

नई दिल्ली | एजेंसी: दिल्ली में सरकार बनाने तो लेकर भाजपा-आप में ठन गई है. आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को कहा कि भाजपा ने पहले हमारे विधायक दिनेश मोहनिया से संपर्क किया और सदन से इस्तीफा देने के लिए सौदेबाजी की, ताकि दिल्ली में भाजपा के लिए सरकार बनाने के अवसर बढ़ सके. हालांकि भाजपा की दिल्ली इकाई के उपाध्यक्ष शेर सिंह डागर ने आरोप का खंडन करते हुए कहा कि आप विधायक भाजपा में शामिल होने की इच्छा लेकर उनसे मिलने आए थे.

वीडियो फुटेज में डागर आप विधायक मोहनिया को धन एवं पद की पेशकश करते हुए नजर आ रहे हैं. दिल्ली में सरकार बनाने की कवायद के बीच भाजपा द्वारा आम आदमी पार्टी के विधायक को कथित तौर पर खरीदने की कोशिश से संबंधित वीडियो सामने आने के बाद भाजपा की दिल्ली प्रदेश इकाई ने मंगलवार को आपातकालीन बैठक बुलाई है.

भाजपा की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष सतीश उपाध्याय बैठक की अध्यक्षता करेंगे. वह अपराह्न् तीन बजे पार्टी के पदाधिकारियों से मिलेंगे और इसके बाद शाम पांच बजे जिला अध्यक्षों से चर्चा करेंगे.

एक सूत्र ने बताया, “पार्टी के नेता मौजूदा स्थिति पर गौर करेंगे और यह भी सुनिश्चित करने की कोशिश करेंगे कि यदि दिल्ली में नए सिरे से विधानसभा के चुनाव होते हैं तो इस वीडियो से पार्टी की छवि को कोई नुकसान न हो.”

आप की ओर से जारी वीडियो में भाजपा की दिल्ली इकाई के उपाध्यक्ष शेर सिंह डागर आप विधायक दिनेश मोहनिया को धन एवं पद की पेशकश करते नजर आ रहे हैं.

डागर ने हालांकि इस वीडियो फुटेज और आरोप का खंडन किया है, लेकिन उनकी पार्टी ने इस मुद्दे से दूरी बना ली है. भाजपा ने डागर से स्पष्टीकरण मांगा है और एक नेता ने तो उन्हें निर्दोष साबित होने तक पद से इस्तीफा देने की सलाह दे डाली है.

वहीं, केजरीवाल ने मंगलवार को डागर के आरोप का खंडन करते हुए कहा, “हमारे विधायक वहां नहीं गए थे. उनसे भाजपा ने संपर्क किया था और यदि वह अपने आप भी वहां गए थे, तो उन्हें चार करोड़ रुपये का प्रलोभन क्यों दिया गया. यह बात साफ थी कि हमारे विधायक को खरीदने की कोशिश की गई.”

केजरीवाल ने आगे कहा, “यह बेहद दुखद बात है कि भाजपा दिल्ली में सरकार बनाने के लिए खरीद-फरोख्त पर उतर आई है.”

दिल्ली की 70 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के पास इस समय 28 सीटें हैं, जबकि आप के पास 27 और कांग्रेस के पास आठ सीटें हैं.

इस साल 14 फरवरी को दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से केजरीवाल के इस्तीफा देने के बाद से यहां राष्ट्रपति शासन लागू है.

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