Delhi-NCR: आज से डीजल टैक्सी बैन

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के मद्देनज़र आज से डीजल टैक्सी पर बैन लगा दिया गया है. पिछले डेड़ साल से कई बार डीजल टैक्सियों को सीएनजी में बदलने के लिये समय देने के बाद आखिरकार सर्वोच्य न्यायालय ने यह फैसला लिया है. इसका सबसे ज्यादा असर गुड़गांव में पड़ेगा जहां करीब 50 हजार डीजल टैक्सियां रजिस्टर्ड हैं. इसके अलावा फरीदाबाद में भी 20 हजार डीजल टैक्सियां रजिस्टर्ड हैं. सर्वोच्य न्यायालय ने विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट आने के बाद पिछले साल 16 दिसंबर को वाहनों को लेकर प्रतिबंध लगाए थे.

चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर, जस्टिस एके सिकरी आर भानुमति की बेंच ने कहा, “प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ रहा है. लोगों की जिंदगी खतरे में है और मंत्रालय के लोग कॉफी पी रहे हैं. वे इस भरोसे बैठे हैं कि कोई आए और समाधान बताए. आप खुद कोई हल क्यों नहीं ढूंढते. दूसरे देश इस विषय में क्या कर रहे हैं, इस पर रिसर्च क्यों नहीं करते.”


वहीं डीजल टैक्सी चालकों की दलील है कि सीएनजी में बदलने के लिये कोई तकनीक नहीं है.

रिपोर्ट में भारत को विश्व के सबसे प्रदूषित 20 देशों में 13वें स्थान पर बताया था. सबसे प्रदूषित दिल्ली थी. कोर्ट के फैसले का सबसे ज्यादा असर हरियाणा पर पड़ेगा, क्योंकि प्रदेश के 13 जिले एनसीआर में हैं.

सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में डीजल टैक्सियों को सीएनजी में बदलने के लिए संचालकों को अधिक समय देने से इंकार कर दिया. इसकी समयसीमा शनिवार को समाप्त हो रही है और इसे पूर्व में दो बार बढ़ाया जा चुका है.

कैब संचालकों और उनके सहयोगियों ने न्यायालय से समयसीमा बढ़ाने का आग्रह किया था. प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति टी.एस.ठाकुर, न्यायमूर्ति ए.के.सीकरी और न्यायमूर्ति आर.भानुमति की पीठ ने इस अनुरोध को खारिज कर दिया.

शीर्ष अदालत ने अपने 16 दिसंबर 2015 के आदेश में दिल्ली के कैब संचालकों से 1 मार्च तक डीजल वाहनों को सीएनजी में बदलने को कहा था. हालांकि 5 जनवरी 2016 के आदेश में अदालत ने इस डेडलाइन को 31 मार्च तक बढ़ा दिया था.

31 मार्च को डीजल कैब संचालकों की अपील के बाद यह समयसीमा एक बार फिर 30 अप्रैल तक के लिए बढ़ा दी गई थी. इसके साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया था कि यह समय सीमा अब और नहीं बढ़ाई जाएगी.

यह फैसला दिल्ली-एनसीआर में बढ़ रहे वायु प्रदूषण के मद्देनजर लिया गया.

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