‘सहकारी संघवाद’ का विकास करें

नई दिल्ली | एजेंसी: प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को राज्यों से कहा कि वे ‘सहकारी संघवाद’ के मॉडल का विकास करें. जिससे केंद्र और राज्य सरकारें मतभेद मिटाकर विकास तथा समृद्धि का एक साझा कार्यक्रम तैयार कर सकें. उन्होंने साथ ही गरीबी को देश की सबसे बड़ी चुनौती बताया. यहां जारी एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, मोदी ने नीति आयोग की संचालन परिषद की प्रथम बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि भारत तब तक विकास नहीं कर सकता, जब तक कि उसके साथ उसके राज्य विकास विकास न करें.

मोदी ने कहा कि वह चाहते हैं कि सरकार की कार्ययोजना को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न राज्य सहकारी प्रतिस्पर्धी संघवाद की भावना के तहत एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करें.

राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान आयोग या नीति आयोग नीतिगत मुद्दे पर काम करने वाला एक थिंक टैंक है, जिसका गठन योजना आयोग को भंग करने के बाद किया गया है. नीति आयोग के गठन का एक मकसद नीति निर्माण में राज्यों को शामिल करना भी है.

बैठक के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संवाददाताओं से कहा कि प्रधानमंत्री ने बैठक में मुख्यमंत्रियों का तीन उप-समूह बनाने की घोषणा की. मुख्यमंत्रियों की पसंद मिलने के बाद विभिन्न समूह के सदस्यों के नाम की घोषणा की जाएगी.

प्रथम समूह प्रत्येक राज्य में कौन-कौन सी केंद्र प्रायोजित परियोजनाएं जारी रखी जाएं और किनमें कटौती की जाए, इस पर विचार करेगा. दूसरा समूह यह तलाश करेगा कि मानव संसाधन विकास के लिए प्रत्येक राज्य में कौन-कौन से कदम उठाए जाएं. तीसरा समूह स्वच्छ भारत अभियान पर काम करेगा.

जेटली ने कहा कि प्रधानमंत्री ने राज्यों से दो कार्यबल गठित करने के लिए भी कहा, जिसमें से एक गरीबी मिटाने पर और दूसरा कृषि क्षेत्र पर काम करेगा.

मोदी ने कहा कि दुनिया भारत को अलग-अलग नजर से देखने लगी है. उन्होंने कहा, “लेकिन अब भी हमारी सबसे बड़ी चुनौती यह है कि गरीबी कैसे मिटे.” उन्होंने कहा कि जब तक विकास नहीं होगा, तब तक नौकरियों का सृजन नहीं होगा और गरीबी नहीं मिटेगी.

मोदी ने कहा, “प्रथम और सबसे महत्वपूर्ण बात, हमें उच्च विकास दर का लक्ष्य बनाना चाहिए.”

मोदी ने कहा कि समय पर फैसला नहीं हो पाने के कारण परियोजनाएं लटक जाती हैं. मोदी ने मुख्यमंत्री से कहा कि जिन कारणों से परियोजनाओं की गति धीमी हो जाती है उन पर निजी तौर पर ध्यान दें.

मोदी ने कहा कि बेहतर योजना निर्माण और बेहतर कार्यान्वयन के लिए केंद्र धन, प्रौद्योगिकी और ज्ञान से राज्यों को मजबूत करना चाहता है.

मोदी ने कहा, “संघवाद के काम करने के लिए जरूरी है कि साझा राष्ट्रीय लक्ष्य के लिए राज्य भी अपनी भूमिका निभाएं.”

मोदी ने यह भी उम्मीद जताई कि नीति आयोग की व्यवस्था के तहत भारत सभी के लिए एक ही तरह की योजना की प्रथा से मुक्त हो सकेगा और योजना तथा राज्यों की जरूरत के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर पाएगा.

बैठक में मुख्यमंत्रियों के बीच वार्ता का समन्वयन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने किया और शुरुआती वक्तव्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने दिया.

जेटली ने यह भी स्पष्ट किया कि आम बजट पर नीति आयोग में कोई चर्चा नहीं हुई.

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