बेटे के लीवर से मां की जिंदगी बची

मुंबई | एजेंसी: बेटे के लिए अपनी जान गंवाने वाली मां की कहानियां तो दुनिया में कई हैं, लेकिन लीवर विफल होने से गहरी मूच्र्छा में चली गई पुणे की महिला को उसके बेटे ने अपना लीवर देकर नई जिंदगी दी है. डॉक्टरों ने कहा कि आपरेशन पूरी तरह सफल रहा और अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद अब मां-बेटे घर पर स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं. गुणवंती गुंदेशा, 49 वर्ष को एक महीने पहले यहां के परेल स्थित ग्लोबल अस्पताल लाया गया था. उस समय वह मरणासन्न अवस्था में थी क्योंकि शरीर का महत्वपूर्ण अवयव लीवर पूरी तरह विफल हो चुका था.

ग्लोबल अस्पताल के चिकित्सक हेमंत वादेयार और समीर शाह सहित मेडिकल टीम ने गुणवंती को तुरंत ही वेंटिलेटर पर रखा और जांच की तो पता चला कि उनका लीवर नाकाम हो चुका है. उनकी हालत लगातार डूबती चली जा रही थी.


दुनिया के मशहूर लीवर विशेषज्ञों में गिने जाने वाले प्रो. मोहम्मद रेला ने कहा, “मरीज की हालत दिमाग में सूजन के कारण बुरी हो रही थी. यह लीवर विफल होने की अंतिम स्थिति होती है. चुनौती बड़ी थी क्योंकि हमें एक ऐसे मरीज का आपरेशन करना था जिसकी हालात अस्थिर थी. इसके साथ ही डोनर का आपरेशन भी इसी अनिवार्यता के साथ पूरी करनी थी.”

रेला ग्लोबल अस्पताल के एचपीबी एवं लीवर ट्रांसप्लांट कार्यक्रम के निदेशक भी हैं. वे चेन्नई से यहां दौड़े हुए आए ओर उसी दिन वे गुणवंती की देखरेख करने वाली टीम में शामिल हुए.

महिला के छोटे बेटे धीरज ने कहा कि ग्लोबल अस्पताल में भर्ती कराने से पहले पुणे के रूबी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. कुछ आयुर्वेदिक औषधियों और अंग्रेजी दवाओं की प्रतिक्रिया के कारण संकटपूर्ण स्थिति में आने से पहले पीलिया हो गया.

यह तय होने के बाद ही कि जान बचाने के लिए आपरेशन जरूरी है, दानदाताओं की जांच की गई और सौभाग्य से दोनों बेटे धवल और धीरज को योग्य पाया गया. दोनों ही अपनी मां की जान बचाने के लिए लीवर दान करने के लिए तैयार हो गए. कुछ परीक्षणों के बाद चिकित्सा टीम ने बड़े बेटे को ही इसके योग्य पाया.

वादेयार ने आईएएनएस से कहा, “सौभाग्य से दानकर्ता का रक्त समूह रोगी से मैच कर गया और इसके अलावा और कोई जटिलता पेश नहीं आई इसलिए हमने आपरेशन करने का फैसला लिया.”

गुणवंती का खराब लीवर पूरी तरह हटा दिया गया और धीरज के लीवर का आधा हिस्सा 12 घंटे तक चले आपरेशन में उनमें आरोपित कर दिया गया.

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