आकर्षक न बनाई जाए हिंसा: साराभाई

मुंबई | एजेंसी: सामाजिक कार्यकर्ता और विख्यात नृत्यांगना मल्लिका साराभाई ने कहा कि मुख्यधारा के सिनेमा में हिंसा इस तरह पेश की जाती है कि वह बच्चों को आकर्षक लगती है और इन फिल्मों में ‘मर्दानगी’ की गलत व्याख्या की जाती है. मल्लिका नृत्य और रंगमंच के माध्यम से सामाजिक मुद्दे उठाती रही हैं.

यहां गुरुवार को ‘आर्ट्स एंड मीडिया : प्रॉब्लम ऑर सोल्यूशन’ विषय पर हुई संगोष्ठी में 59 वर्षीया समामाजिक कार्यकर्ता ने कहा कि ‘दबंग’ जैसी फिल्में बच्चों के मनोविज्ञान को प्रभावित कर रही हैं.


उन्होंने कहा, “हमारे समाज में रोक या सेंसरशिप काम नहीं करने वाली है. हमें समस्याओं को समझने और इससे निबटने के रास्ते खुद तलाशने की जरूत है.”

उन्होंने कहा, “हमें हिंसा को फिल्मों के जरिए आकर्षक बनाने की जरूरत नहीं है. वहीं, ‘मर्दानगी’ शब्द का मतलब भी उपद्रवी और आक्रामक है. और संवेदनशील पुरुष ‘बेकार’ माने जा रहे हैं.”

उन्होंने कहा कि हिंदी फिल्म ‘दबंग’ में सलमान खान का किरदार एक ऐसा रोल मॉडल बन गया है, जो बच्चों का दिमाग बर्बाद कर रहा है.

फिल्मकार और फोटोग्राफर वंदना कोहली ने भी यही बात दोहराई. उन्होंने कहा, “लाखों लोगों ने रोल मॉडल देखे हैं और वे कई दफा मौखिक शिष्टाचार की सीमा लांघते हैं.”

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