बालू उत्खनन के लिए पर्यावरणीय मंजूरी जरूरी

नई दिल्ली | एजेंसी: राज्य सरकारों को नदियों की तलहटी से बालू उत्खनन के लिए केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से पहले मंजूरी लेना जरूरी हो गया है.

राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से मंजूरी के बगैर देशभर में नदियों की तलहटी में बालू उत्खनन पर रोक लगा दी है. इसके साथ ही न्यायाधिकरण ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को इसके बाबत नोटिस भेजा है.


इस नोटिस में न्यायाधिकरण ने कहा है कि कानून का उल्लंघन कर बड़े पैमाने पर बालू उत्खनन की गतिविधियां हो रही हैं, जिससे राजस्व को लाखों-करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है.

न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय पीठ ने राज्यों से 14 अगस्त तक जवाब मांगा है. पीठ ने कहा कि नदियों की तलहटी से खनिज तत्व निकालने के लिए खनन गतिविधियों में संलग्न बहुत से लोगों के पास वास्तव में इसका लाइसेंस नहीं है.

पीठ ने अपने आदेश में कहा, “हम पर्यावरण मंत्रालय से पर्यावरणीय मंजूरी और अधिकृत प्राधिकार से लाइसेंस के बगैर किसी भी व्यक्ति, कंपनी, प्राधिकार के बालू उत्खनन से संबंधित गतिविधियों पर रोक लगाते हैं.”

हरित न्यायाधिकरण का ये फैसला ऐसे समय आया है जब अवैध उत्खनन के मामलों को लेकर देश में बड़ी बहस छिड़ी हुई है और उत्तर प्रदेश में नोएडा की एसडीएस दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन को भी रेत माफिया से जोड़कर देखा जा रहा है.

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