वो कहां हैं जिन्हें हिन्द पर नाज़ है!!

रायपुर | अन्वेषा गुप्ता: ‘लीकगेट कांड’ में देश के अग्रणी औद्योगिक घरानों के उच्चाधिकारी गिरफ्तार किये हैं. दूसरी तरफ देश है कि अभी तक नींद से नहीं जागा है. शनिवार तक 12 आरोपियों की गिरफ्तारी पुलिस कर चुकी है. हैरत की बात है कि अभी तक उन पर कोई उंगली तक नहीं उठाई गई है जिन्हें इस कॉर्पोरेट जासूसी से आर्थिक लाभ मिलता रहा है. इसी से सवाल खड़े हो रहें हैं कि वे देशभक्त कहां हैं जिन्हें हिन्द पर नाज़ है. अब समय आ गया है कि वे इस बिना नियमों के ‘कॉर्पोरेट खेल’ के खिलाफ आवाज़ उठाये. खबरिया चैनलों के हवाले से जानकारी मिल रही है कि इसके तार रक्षा मंत्रालय तक गयें हैं. यहां पर इस बात का उल्लेख करना गलत न होगा कि अमरीका में एक भारतीय मूल का कॉर्पोरेट कलाकार रजत गुप्ता केवल कंपनी के सूचना को लीक करके अपने परिचित को आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिये सलाखों के पीछे है. यह वहीं अमरीका है जिसकी साथ भारत गलबहिंयां डालकर विश्व मंच पर प्रकट होता है.

खबर यह भी है कि बजट भाषण के कुछ अंश चुरा लिये गये हैं. जाहिर है कि इस कृत्य को व्यापारिक प्रतिस्पर्धा के नाम पर हल्के ढ़ंग से नहीं लिया जा सकता है. चोरी, वह भी केन्द्र सरकार के मंत्रालय से, काफी है देश की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलने के लिये. उधर, एक के बाद एक मिसाइलों का परीक्षण किया जा रहा है जबकि देश के सुरक्षा तथा नीतियों से जुड़े हुए दस्तावेज सुरक्षित नहीं है.


इन गिरफ्तार 12 आरोपियों पर आरोप है कि इन्होंने पेट्रोलियम मंत्रालय से सरकारी कागजातों की चोरी करवाई थी. इसे राजनीतिक भाषा में औद्योगिक जासूसी कहा जाता है जिसे देश के मंत्रालयों में घुसपैठ कर अंजाम दिया गया. जाहिर है कि उन्हें देशद्रोही से कम करके नहीं आंका जा सकता है. मामला जितना दिख रहा है उससे भी गंभीर तथा उलझा हुआ है जिसके पर्ते उधेड़ने पर कई बड़े सफेदपोश बेनकाब होंगे. इन सब के बीच में आश्चर्य होता है कि देश के लिये जी-जान लगा देने का दावा करने वाले राष्ट्रवादी चुप्पी साधे हुए हैं.

गोपनीय दस्तावेजों की चोरी की घटना संसद भवन के पास कड़ी सुरक्षा वाले शास्त्री भवन स्थित मंत्रालय के दफ्तर में हुई. इनमें कई दस्तावेज ऐसे भी हैं जिन पर पिछले सप्ताह ही हस्ताक्षर किए गए. लीक दस्तावेजों में मासिक गैस रिपोर्ट, दिसंबर 2014 शामिल है. इस पर 16 फरवरी का हस्ताक्षर है. इसके अलावा प्राधनमंत्री के प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा का पत्र भी है. लीक दस्तावेज में नेचुरल गैस पर वित्त मंत्री अरुण जेटली बजट भाषण 2015-16 का हिस्सा भी शामिल है. उल्लेखनीय है, बजट को अतिगोपनीय दस्तावेज माना जाता है जब तक कि वित्तमंत्री इसे सदन पटल पर पेश नहीं कर देते.

दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने शनिवार को पेट्रोलियम मंत्रालय से दस्तावेज लीक करने के मामले में गिरफ्तार दो आरोपियों के दिल्ली और नोएडा स्थित दफ्तरों पर छापे मारे हैं. जुबिलेंट एनर्जी के वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी सुभाष चंद्रा के नोएडा स्थित दफ्तर पर भी छापेमारी की गई. चंद्रा को औद्योगिक संस्थाओं के चार अन्य अधिकारियों के साथ गिरफ्तार किया गया है.

राजधानी की एक अदालत ने चंद्रा के साथ-साथ रिलायंस इंडिया लिमिटेड के निगमित मामलों के प्रबंधक शैलेश सक्सेना, रिलायंस एडीएजी के उप-महाप्रबंधक ऋषि आनंद, एस्सार के उप-महाप्रबंधक विनय और केयर्न इंडिया के महाप्रबंधक के.के. नाईक को तीन दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया है. पुलिस ने शुक्रवार को इसी मामले में सात और लोगों को गिरफ्तार किया था, इसके साथ ही इस मामले में अब तक कुल 12 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं.

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेद्र प्रधान ने शनिवार को कहा कि पेट्रोलियम मंत्रालय से दस्तावेजों के लीक होने की जांच पूरी होने के बाद मामला अधिक स्पष्ट हो जाएगा. प्रधान ने टाइम्स नाउ चैनल से कहा, “पुलिस मामले की एक स्वतंत्र जांच कर रही है. जांच पूरी हो जाने के बाद सबकुछ साफ हो जाएगा.”

केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि पेट्रोलियम मंत्रालय से महत्वपूर्ण दस्तावेजों की चोरी करने वाले दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. राजनाथ ने कहा कि घोटाले का पर्दाफाश करने के लिए सरकार की सराहना की जानी चाहिए.

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “हमारी सराहना होनी चाहिए कि हमने इसका पता लगाया. दोषियों को सजा दी जाएगी.” उन्होंने आगे कहा, “यदि हम सतर्क नहीं होते, तो इस घोटाले का भंडाफोड़ नहीं हो पाता.”

पेट्रोलियम मंत्रालय से हुई दस्तावेजों की चोरी के मामले में आरोपी पूर्व पत्रकार शांतनु सैकिया ने शनिवार को कहा कि यह 10,000 करोड़ रुपये का घोटाला है. सैकिया को जिस समय न्यायालय ले जाया जा रहा था, उस दौरान उसने यहां अपराध शाखा के कार्यालय के बाहर पत्रकारों से कहा, “यह 10,000 करोड़ रुपये का घोटाला है और यह पूर्व नियोजित था.”

इस कॉरर्पोरेट चोरी के असल अपराधी तो वे हैं जिन्हें इन सूचनाओं के बिना पर अपनी तिजोरी का वज़न बढ़ाया है न कि वे जो रंगे हाथ पकड़े गये हैं. हैरत तब होता है जब इन कॉर्पोरेट चोरों के खिलाफ आम आदमी चुप्पी साध लेता है. न सोशल मीडिया पर ताने कसे जा रहें हैं और न ही उनके पुतले जलाये जा रहें हैं. जिन्होंने चंद पैसों के लिये अपने ईमान को बेचा वे हथकड़ियों में जकड़े पुलिस तथा मीडिया के निशाने पर हैं और जिन्होंने यह सब करवाया है वे बड़ी-बड़ी अट्टलिकाओं में ठंडे कमरे में क्रिकेट मैच देख रहें हैं.

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