कोयले की कालिख मनमोहन तक

नई दिल्ली | एजेंसी: पूर्व कोयला सचिव ने कहा है कि पीएम मनमोहन सिंह को कोयला घोटाले में आरोपी बनाया जाये. गौर तलब है कि मंगलवार को सीबीआई ने पूर्व कोयला सचिव प्रकाशचंद पारेख के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी. एक अंग्रेजी अखबार के माध्यम से प्रधानमंत्री पर उन्होंने यह आरोप लगाया है.

ज्ञात्वय रहें कि पूर्व कोयला सचिव प्रकाशचंद पारेख के अलावा उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला, नाल्को, हिंडाल्को समेत 14 लोगों पर सीबीआई ने मुकदमा दर्ज किया था. कोयला घोटाने के मामले में यह सीबीआई की 14वीं एफआईआर है.

प्रसिद्ध हिंदी फिल्म दीवार की तर्ज पर पारेख ने कहा, ‘इस समय सीबीआई जनहित में लिए गए फैसले और गलत फैसले में फर्क नहीं कर पा रही है. अगर सीबीआई इस नतीजे पर पहुंची है कि तालाबीरा कोयला खदान को हिंडाल्को को दिया जाना कोई साजिश थी तो इस आवंटन को मंजूरी देने वाले प्रधानमंत्री को इस मामले में पहला आरोपी बनाया जाना चाहिए, क्योंकि उन्होंने ही इस फैसले पर साइन किए थे.

सीबीआई को आड़े हाथो लेते हुए उन्होंने कह कि ये हैरानी की बात है कि सीबीआई मेरी नीयत पर शक कर रही है जबकि मैंने ही तमाम विरोधों के बावजूद कोयला सेक्टर में पारदर्शिता लाने की कोशिश की थी. प्रकाशचंद पारेख की छवि एक ईमानदार अफसर के रूप में रही है. बताया जाता है कि उन्होंने ही कोयला घोटाले को उजागार किया था.

पारेख को मार्च 2004 में कोयला सचिव बनाया गया था. आरोप है कि इस दौरान कई बार उन्हें पद से हटाने की कोशिश की गई. अपने कार्यकाल में पारेख स्क्रीनिंग कमेटी के मुखिया भी थे. जिसने प्राइवेट कंपनियों को कोयला खदानों का आवंटन किया.

वे इस पक्ष में थे कि कोयला खदानों का आवंटन ना करके उन्हें नीलाम किया जाए. इसके लिए उन्होंने एक कैबिनेट नोट भी तैयार करवाया था. पारेख चाहते थे कि माइनिंग एक्ट में बदलाव करके कोयला खदानों को नीलाम ही किया जाए. लेकिन इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया था.

भाजपा ने मांग की है कि कोयला घोटाले की निष्पक्ष जांच करायी जाये.

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