नेताजी के परिवार की जासूसी?

रायपुर | समाचार डेस्क: छत्तीसगढ़ के पूर्व डीजीपी तथा आईबी के पूर्व अफसर ने नेताजी के परिवार की जासूसी पर प्रश्न चिन्ह लगा दिये हैं. आईबी के पूर्व अफसर विश्वरंजन ने रायपुर में कहा है कि उन्होंने अपने 22 साल के आईबी के करियर में कभी ऐसा नहीं सुना था. हालांकि, विश्वरंजन आईबी में 1985 में पदस्थ हुये थे तथा नेताजी के परिवार की जासूसी की बात 1948 से लेकर 1968 तक की है. फिर भी सवाल उठता है कि यदि वाकई में नेताजी के परिवार की जासूसी करवाई गई होती तो क्या विश्वरंजन जैसे बड़े अफसर से यह बात छुपी रह सकती थी. नेताजी सुभाषचंद्र बोस के रिश्तेदारों की जासूसी की बात मीडिया में आने पर इंटेलिजेंस ब्यूरो में वर्षो सेवा दे चुके सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक विश्वरंजन ने कहा कि उन्होंने 22 साल के अपने कॅरियर में नेताजी के परिवार की जासूसी की कभी कोई चर्चा नहीं सुनी. मीडिया में शुक्रवार को यह बात सामने आई थी कि देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने करीब दो दशकों तक नेताजी सुभाष चंद्र बोस के रिश्तेदारों की जासूसी करवाई थी. बताया गया कि गुप्त सूची से हाल ही में हटाई गई इंटेलिजेंस ब्यूरो की दो फाइलों से यह खुलासा हुआ है.

फाइलों से पता चला है कि 1948 से 1968 के बीच सुभाष चंद्र बोस के परिवार पर अभूतपूर्व निगरानी रखी गई थी. इन 20 वर्षो में 16 साल पंडित नेहरू प्रधानमंत्री थे.


छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक पद से सेवानिवृत्त हुए विश्वरंजन का आईबी से लंबा नाता रहा है. अपनी नौकरी के 22 साल उन्होंने आईबी में अपनी सेवाएं दी हैं. उनके अनुसार, वर्ष 1985 से 2007 तक वह आईबी में पदस्थ रहे. इस दौरान वह गुजरात, बिहार और दिल्ली स्थित आईबी मुख्यालय में महत्वपूर्ण पद पर पदस्थ रहे. बाद में आईबी छोड़कर वह छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक बने थे.

उनका कहना है कि अपने आईबी में पदस्थापना के दौरान नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जासूसी की न तो कभी चर्चा हुई और न ही कोई चर्चा सुनी थी.

मीडिया में आई खबर के मुताबिक, आईबी के दो दस्तावेजों से पता चला है कि सुभाषचंद्र बोस के भाई शरदचंद बोस के दो बेटों शिशिर एवं अमियनाथ बोस की निगरानी की गई थी. जासूसी का मकसद हालांकि स्पष्ट नहीं हो सका है. यहां यह भी बताना जरूरी है कि चर्चा चलती रही है कि 1945 में विमान दुर्घटना में नेताजी का निधन हो गया था. अभी तक इसकी भी पुष्टि नहीं हो सकी है.

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