फेक न्यूज पर लगेगी लगाम

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ सरकार सोशल मीडिया पर ‘फेक न्यूज’ की मॉनिटरिंग के लिये विशेष मॉनिटरिंग सेल का गठन करने वाली है. इस विशेष सेल के अध्यक्ष पुलिस विभाग में आई.जी. स्तर के अधिकारी होंगे.

सेल के सदस्यों में वरिष्ठ पत्रकार, एस.पी. स्तर के अधिकारी, शासकीय अधिवक्ता, जनसम्पर्क विभाग के अधिकारी और चिप्स के अधिकारी रहेंगे.


यह राज्य स्तरीय सेल छत्तीसगढ़ में फेक न्यूज की मॉनिटरिंग और इन पर रोक लगाने के लिए आवश्यक कार्यवाही करेगा.

इसके अलावा फेक न्यूज की जानकारी मिलने पर स्वतः संज्ञान ले सकेगा.

फेक न्यूज का धंधा

दुनिया भर में फर्जी खबरों का बहुत बड़ा कारोबार है.

आम तौर पर ऐसी खबरें वाट्सऐप, फेसबुक और ट्वीटर से फैलाई जाती हैं. कुछ राजनीतिक संगठन तो बजाप्ता इसके लिये सेल बना कर इस तरह की फर्जी और भावनात्मक खबरें प्रचारित करने का काम करते हैं.

इसका बाज़ार कितना बड़ा है, इसका अनुमान अमरीकी चुनाव के समय आये आंकड़ों से लगाया जा सकता है.

2016 में आये बज़फीड न्यूज के क्रेग सिल्वरमैन के अनुसार अमरीकी चुनाव के शुरुआती तीन महीनों के ही दौरान अकेले शीर्ष 20 फर्जी खबरों के निर्माताओं द्वारा 8,7,11,000 से अधिक फर्जी प्रतिक्रियायें, टिप्पणी और शेयर को जेनरेट किया गया.

जाहिर है, इस तरह के आंकड़ों में कोई कमी तो आने से रही. दूसरी ओर भारत जैसे देश में भी फर्जी खबरों का कारोबार शीर्ष पर है.

अनुमान है कि चुनावी दिनों में यह और परवान चढ़ेगा.

फेक न्यूज पर कवायद

इससे पहले केंद्र सरकार द्वारा सोशल मीडिया पर फैलाये जाने वाले अफवाहों और फेक न्यूज पर लगाम लगाने के उद्देश्य से वर्ष 2011 में जारी नियमों के स्थान पर सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती संस्थानों के लिए दिशा निदेर्श) नियम 2018 के मसौदे पर आम लोगों से राय मांगी गयी थी.

इसके बाद केंद्र सरकार ने मौजूदा आईटी ऐक्ट के तहत धारा-79 में संशोधन का प्रस्ताव बना दिया है. इस संशोधन के प्रस्ताव को पीएमओ ने भी अपनी मंजूरी दे दी है. जल्द ही इसे इसे कैबिनेट के सामने पेश किया जाएगा.

इस संशोधन में सोशल नेटवर्किंग साईट्स पर शेयर हो रही फेक न्यूज के लिए सीधे तौर पर कंपनियों को जिम्मेदार माना गया है.

फेक न्यूज के फेर में

अंतरराष्ट्रीय मार्केट रिसर्च एजेंसी इप्सॉस ने कुछ दिनों पहले ही फेक न्यूज और सामग्री को लेकर एक सर्वेक्षण करवाया था.

27 देशों में 19,000 लोगों के बीच किये गये सर्वे में शामिल भारतीयों में से 72 प्रतिशत ने कहा कि वे अक्सर इस तरह की सामग्री देखते हैं.

लगभग 55 प्रतिशत भारतीयों ने माना कि वे कुछ अवसरों पर फर्जी खबर पर भरोसा कर बैठे थे और कुछ समय बाद उन्हें पता चला कि यह खबर पूरी तरह से फर्जी है.

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