विदेशियों को भाया नालंदा

बिहार शरीफ | एजेंसी: प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर नालंदा में प्राचीन, पौराणिक और ऐतिहासिक स्थलों की लंबी श्रृंखलाएं हैं. जो इन दिनों विदेशी मेहमानों से गुलजार हैं. यूरोपीय देशों से मेहमानों के आगमन से इस क्षेत्र के व्यवसायी भी खुश हैं.

आंकड़ों पर गौर करें तो अक्टूबर से दिसंबर के पहले पखवाड़े तक यूरोपीय देशों के आठ हजार से ज्यादा पर्यटक नालंदा का दीदार कर चुके हैं.


भारतीय पुरातत्व विभाग सर्वेक्षण द्वारा प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के खंडहर के टिकट की बिक्री के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष अक्टूबर से मध्य दिसंबर तक यूरोपीय देशों से कुल 8,700 से ज्यादा पर्यटक नालंदा का विश्व प्रसिद्ध खंडहर देखने आए, जबकि इसी दौरान सार्क देश समेत भारत के 1़ 88 लाख पर्यटक नालंदा की विरासत से रूबरू हुए.

गौरतलब है कि पांचवीं सदी में बने प्राचीन विश्वविद्यालय में करीब 10 हजार छात्र पढ़ते थे, जिनके लिए 1,500 अध्यापक हुआ करते थे. छात्रों में अधिकांश एशियाई देशों-चीन, कोरिया, जापान से आने वाले बौद्धभिक्षु होते थे. इतिहासकारों के मुताबिक, चीनी भिक्षु ह्वेनसांग ने भी सातवीं सदी में नालंदा में शिक्षा ग्रहण की थी. उन्होंने अपनी किताबों में नालंदा के विश्वविद्यालय की भव्यता का जिक्र किया है.

माना जाता है कि प्राचीन काल में नालंदा विश्वविद्यालय बौद्ध धर्म का सबसे बड़ा शिक्षण केंद्र था.

नालंदा की हरियाली जहां प्राकृतिक सौंदर्य प्रेमियों को लुभाती है, वहीं धर्म में आस्था रखने वाले लोग नालंदा के राजगीर आकर अपने आराध्य का दर्शन कर खुद को धन्य मानते हैं. राजगीर हिंदू, जैन और बौद्ध धर्मावलंबियों का प्रमुख तीर्थस्थल है.

राजगीर के पंच पहाड़ियों विपुलगिरि, रत्नागिरि, उदयगिरि, सोनगिरी और वैभारगिरि न केवल प्राकृति सौंदर्य से परिपूर्ण है, बल्कि मान्यता है कि जैन धर्म के जो 11 गंधर्व हुए हैं, उनका निर्वाण भी राजगीर में ही हुआ है. आज भी इन पांचों पहाड़ियों पर जैन धर्म के मंदिर हैं.

इसी तरह भगवान बुद्ध रत्नागिरि पर्वत के नजदीक गृद्धकूट पहाड़ी पर बैठकर लोगों को उपदेश देते थे. इतिहास के पुस्तकों के अनुसार प्राचीन में राजगीर को बसुमति, बृहद्रथपुर, गिरिवगज, कुशाग्रपुर एवं राजगृह के नाम से जाना गया है. राजगीर में ऐतिहासिक, प्राचीन एवं धार्मिक स्थलों का संग्रह है.

यहां जहां सप्तकर्णि गुफा, सोन गुफा, मनियार मठ, जरासंध का आखाड़ा, तपोवन, वेनुवन, जापानी मंदिर, सोनभंडार गुफाएं, बिम्बिसार कारागार, आजातशत्रु का किला है तो रत्नागिरी पहाड़ पर बौद्ध धर्म का शांतिस्तूप है.

आंकड़ों के मुताबिक, इस वर्ष अक्टूबर महीने में नालंदा आने वाले यूरोपीय देशों से जुड़े पर्यटकों की संख्या 2,153 रही, वहीं नवंबर महीने में यह संख्या बढ़कर 4,713 हो गई, जबकि दिसंबर के मध्य तक यह संख्या 1,850 के करीब तक पहुंच गई.

इधर, पर्यटकों के आने के कारण व्यवसायियों में भी उत्साह है. व्यवसायियों का कहना है कि इस वर्ष चीन और थाईलैंड के पर्यटक खूब आ रहे हैं.

राजगीर होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष रामकृष्ण प्रसाद सिंह ने आईएएनएस को बताया कि वर्ष 1990 के बाद यहां पर्यटकों की संख्या में कमी आई थी, परंतु वर्ष 2007 के बाद स्थिति बदली है.

वे कहते हैं कि पूर्व में जहां यहां के होटलों में वीरानी छाई रहती थी, वहीं अब नवंबर से फरवरी में तो होटलों में जगह ही नहीं मिलती. अन्य समय में भी यहां के होटल, लॉज, धर्मशाला भरे रहते हैं.

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