शाही की नियुक्ति रद्द, जीडी शर्मा फिर बने बीयू के कुलपति

रायपुर | संवाददाता: बिलासपुर विश्वविद्यालय के कुलपति के पद पर प्रोफेसर सदानंद शाही की नियुक्ति रद्द कर दी गई है.विश्वविद्यालय के निवर्तमान कुलपति गौरीदत्त शर्मा को फिर से कुलपति पद पर नियुक्त किया गया है. राजभवन से 19 जुलाई को इस संबंध में प्रोफेसर सदानंद शाही के नियुक्ति आदेश को वापस लेने संबंधी प्रपत्र जारी कर दिया गया है.

गौरतलब है कि बिलासपुर विश्वविद्यालय के कुलपति गौरीदत्त शर्मा का कार्यकाल इस साल मई में समाप्त हो रहा था. इस बीच 23 मई को बनारस के प्रोफेसर सदानंद शाही को नये कुलपति के रुप में नियुक्त करने का आदेश जारी किया गया.


लेकिन शाही की नियुक्ति आदेश के साथ ही विवाद शुरु हो गया. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने जहां एक ओर कुलपति को वामपंथी बताते हुये धरना-प्रदर्शन दिया, वहीं शाही के खिलाफ यह भी शिकायत की गई कि शाही कुलपति पद के लिये निर्धारित अर्हता पूरी नहीं करते.

इसके बाद राजभवन ने सदानंद साही के कुलपति बनाये जाने संबंधी अपने आदेश पर रोक लगा दी. पूरे मामले की जाँच कराने का फ़ैसला लिया गया. इसके लिये रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति डाक्टर एस के पांडेय को जाँच अधिकारी नियुक्त किया गया था. जांच रिपोर्ट में शाही पर लगे आरोपों को सही ठहराया गया. इसके बाद शाही और शिकायतकर्ता को अपना पक्ष रखने के लिये राजभवन बुलाया गया था.

शाही की नियुक्ति आदेश वापस लिये जाने के बाद प्रोफेसर सदानंद शाही ने कहा है कि इस मामले में झूठ की जीत हुई है और सत्य पराजित हुआ है. उन्होंने कहा कि इस मामले में वे राज्यपाल से फिर से सत्य की रक्षा की अपील करने के लिये पत्र लिखेंगे. शाही ने कहा कि अभी जो आदेश पत्र मिला है, उससे यह स्पष्ट नहीं है कि यह आदेश मेरी नियुक्ति को रद्द करने से जुड़ा है या मेरी नियुक्ति पर लगाये गये आदेश को रद्द करने संबंधी है.

इधर कुलपति की नियुक्ति करने वाली कमेटी के अध्यक्ष एस के मिश्र ने कहा है कि उन्हें यह नहीं पता कि सदानंद शाही की नियुक्ति का आदेश किन कारणों से रद्द हुआ है. मिश्र ने यह भी कहा कि कुलपतियों के आवेदन में से चुने हुये नाम ही उनकी कमेटी को सौंपे गये थे. उनका कहना था कि संभव है, किसी तकनीकि आधार पर प्रोफेसर शाही की नियुक्ति रद्द की गई हो.

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