जीएसटी से जीडीपी बढ़ेगा

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: मोदी सरकार जीएसटी को लागू करने जा रही है. उल्लेखनीय है अप्रत्यक्ष करों के स्थान पर एक जीएसटी लागू करने से देश के सकल घरेलू उत्पादन में 1 से 2 फीसदी की बढ़ोतरी होने का दावा किया जा रहा है. इससे पहले की मनमोहन सिंह की सरकार ने भी इसी जीएसटी को लागू करने की असफल कोशिश की थी. खासकर, विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिये जीएसटी आवश्यक है क्योंकि विदेशी निवेशकर्ता अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग करों के फेर में नहीं पड़ना चाहते हैं. इस जीएसटी से शराब, तंबाखू तथा पेट्रोलियम पदार्थो को कुछ वर्षो के लिये छूट देना प्रस्तावित है.

बहरहाल, इससे राज्यों के आय पर नकारात्मक असर पड़ेगा जिसको लेकर विभिन्न तरह का विरोध सामने आ रहा है. केन्द्र सरकार इस जीएसटी को अप्रैल 2016 से लागू करना चाहती है. केंद्र सरकार ने शुक्रवार को चिर प्रतीक्षित वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी विधेयक लोकसभा में पेश कर अप्रत्यक्ष कर में सुधार का रास्ता खोला. विधेयक पेश करते हुए केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा कि इस कानून को बनाने का मकसद यह है कि पूरे देश में वस्तु एवं सेवा बिना बाधा के स्थानांतरित हो.

जेटली ने इसे 1947 के बाद सबसे महत्वपूर्ण कर सुधार बताया. उन्होंने कहा कि इस पर संसद के अगले सत्र में चर्चा होगी.

जेटली ने कहा कि जीएसटी केंद्र और राज्य सरकार दोनों के लिए हितकर है.

उन्होंने कहा, “जीएसटी केंद्र और राज्य दोनों के लिए लाभकारी है. जीएसटी एक महत्वपूर्ण कानून है और इस अकेले कानून से पूरा देश एक बाजार बन जाएगा और बाजार को एक के बाद दूसरे कर के जंजाल से मुक्ति मिल जाएगी.”

जीएसटी में पूरे देश के लिए एक बिक्री कर का प्रस्ताव है, जिसमें राज्यों में लगने वाले अनेक प्रकार के कर समां जाएंगे, जिससे निवेश बाधित हो रहा है.

उन्होंने कहा कि यहां एक बैठक में राज्यों के वित्त मंत्रियों के अधिकार प्राप्त समिति के बीच लगभग सहमति बन गई है.

जेटली ने कहा, “हम यह सुनिश्चित करेंगे कि हर राज्य का हित पूरा हो और किसी भी राज्य की आय का एक रुपये का भी नुकसान न हो.”

जीसटी सुधार से सहकारिता संघवाद का सिद्धांत मजबूत होगा, क्योंकि केंद्र और राज्य को मिलकर फैसला लेना होगा, जिसके लिए जीएसटी परिषद में 75 फीसदी बहुमत की मंजूरी की जरूरत होगी.

विधेयक पेश करने के बाद संवाददाताओं से जेटली ने कहा, “राज्यों के साथ हुई मेरी बैठक में उनमें राजनीति मुद्दे पर मतभेद नहीं था. वे केंद्र और राज्य संबंध में सुविधा चाह रहे थे. यही भारतीय संघवाद का सबसे सुनहरा पक्ष है.”

पिछली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार ने जीएसटी पेश करने के लिए 2011 में लोकसभा में एक संविधान संशोधन विधेयक पेश किया था. राज्यों ने पांच साल तक क्षतिपूर्ति की मांग की है और इसे विधेयक में शामिल करने की भी मांग की है.

जेटली ने कहा कि केंद्रीय बिक्री कर, सीएसटी में कटौती के कारण राज्यों को हुए नुकसान की आंशिक भरपाई के लिए राज्यों को मौजूदा कारोबारी वर्ष में 11 हजार करोड़ रुपये दिए जाएंगे.

भरपाई का मुद्दा इसलिए उठा, क्योंकि केंद्र सरकार ने राज्य स्तर पर एक अप्रैल 2005 को वैट लागू होने के बाद विभिन्न चरणों में सीएसटी को चार फीसदी से घटाकर दो फीसदी कर दिया है.

सीएसटी एक केंद्रीय कर है, जिसकी वसूली राज्य करते हैं.

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने बुधवार को जीएसटी को मंजूरी दी थी, जिससे संसद में पेश किए जाने का रास्ता साफ हो गया था.

इस विधेयक को कानून बनने के लिए संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत से पारित होना होगा और देश के 29 राज्यों में से आधे की विधायिका में भी पारित होना होगा.

जीएसटी लागू होने से केंद्र और राज्यों के अनेक कर समाप्त हो जाएंगे और पूरा देश कर के मामले में एक विशाल बाजार बन जाएगा, जिससे कारोबार फैलाने की सुविधा होगी और जिसके कारण आपूर्ति श्रंखला मजबूत होगी.

नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकॉनॉमिक रिसर्च के एक अध्ययन के मुताबिक जीएसटी पूरी तरह से लागू होने से विकास दर में 0.9-1.7 फीसदी तक की वृद्धि होगी.

ताजा घटनाक्रम पर केपीएमजी इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सचिन मेनन ने कहा, “यह भारतीय वित्तीय सुधार के इतिहास में मील का पत्थर है. 2006 के बाद से जीएसटी को लाने के लिए किए गए सभी कार्यो के योगदान को देश याद रखेगा.”

ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को कहा कि वह वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी के विरुद्ध नहीं है, लेकिन वह चाहती है कि राज्यों को होने वाले नुकसान की समचुत भरपाई की जाए. उन्होंने यहां संवाददाताओं के साथ एक अनौपचारिक बातचीत में कहा, “हमें जीएसटी से कोई समस्या नहीं. हमने घोषणापत्र में इसके लिए वादा किया था. हम इसके पक्ष में हैं. लेकिन राज्यों को होने वाले नुकसान की भरपाई की जानी चाहिए.” बनर्जी शुक्रवार को राजधानी में थीं. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अपने वादे से मुकर रही है.

ओ. पन्नीरसेल्वम

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम ने शुक्रवार को वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी के कई पहलुओं पर सहमति बनाए बगैर इस पर संविधान संशोधन विधेयक पेश किए जाने की कड़ी आलोचना की. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा और उसकी सामग्री मीडिया को भी जारी की. सरकार का पहले जीएसटी पर संविधान संशोधन विधेयक पेश करने और उसके बाद जीएसटी परिषद के जरिए वास्तविक कर, कर बैंड और अन्य मुद्दों पर सहमति कायम करने का प्रस्ताव स्वीकार्य नहीं है.

उन्होंने कहा, “हम यह कहना चाहेंगे कि भारत सरकार को पहले राज्यों के वित्त मंत्रियों के अधिकार प्राप्त समूह को महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनाने की अनुमति दी जानी चाहिए और तब जीएसटी पर संविधान संशोधन विधेयक पर आगे बढ़ना चाहिए.”

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