पॉलिसी पैरालाइसिस से एक्टिवेशन की ओर

नई दिल्ली | एजेंसी: मोदी सरकार ने बीमा और रक्षा में एफडीआई को बढ़ा दिया है. मोदी सरकार ने नीतिगत अवरोध की धारण को तोड़ते हुए बीमा और रक्षा उपकरण क्षेत्र में एफडीआई सीमा को वर्तमान 26 फीसदी से बढ़ाकर 49 फीसदी कर दिया. इस प्रकार से मोदी सरकार ने नीतिगत मामलों में फैसला लेने की शुरुआत कर दी है.

गौरतलब है कि मनमोहन सिंह की सरकार पर उद्योगपति आरोप लगाते रहें हैं कि नीतिगत मामलों में फैसले लेने में सरकार अक्षम है जिसके कारण देश में निवेश नहीं आ रहा है. मोदी ने अपने चुनाव प्रचार में कहा ता कि देश में निवेश के वातावरण को बनाया जायेगा. प्रस्तुत बजट में उसी की झलकियां मिलती हैं.

बजट में हालांकि सब्सिडी व्यवस्था को फिलहाल नहीं बदला गया है, जिसे पूरी तरह से बदले जाने की चर्चा थी और कहा गया कि बाद में खर्च प्रबंधन समिति की सिफारिशों के बाद इसे किया जाएगा.

उद्योग जगत के लिए मंत्री ने कहा कि पूरे देश में वस्तु एवं सेवा कर इस साल के आखिर तक लागू कर दिया जाएगा और प्रत्यक्ष कर संहिता पर सरकार नया नजरिया अपनाएगी. इसके साथ ही देश और विदेश के निवेशकों की सबसे बड़ी चिंता का सबब बना प्रतिगामी प्रभावी से लगने वाले कर के लिए बजट में कहा गया कि इसे साधारण तौर पर नहीं लगाया जाएगा.

कई कारोबारी क्षेत्रों के लिए सीमा शुल्कों और उत्पाद शुल्कों को तर्कसंगत किया गया.

उद्योग जगत ने आम बजट का स्वागत किया है. भारतीय उद्योग परिसंघ ने व्यावहारिक और शानदार बजट देने के लिए वित्त मंत्री की सराहना की और कहा, “इसमें अर्थव्यवस्था के लिए निकट भविष्य के लिए एक दृष्टि है और यह रोजगार सृजन तथा विकास के मामले में उद्योग की आशाओं के अनुरूप है.”

फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स एंड कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने कहा, “इसमें निकट भविष्य और लंबी अवधि दोनों के लिए लिए कदम उठाए गए हैं, जिससे सभी संबंधित पक्षों का मनोबल बढ़ेगा.”

महंगाई और सुस्त अर्थव्यवस्था के बीच भी वित्त मंत्री ने वित्तीय घाटा को सकल घरेलू उत्पाद के 4.1 फीसदी तक सीमित रखने की चुनौती स्वीकार की. यही नहीं उन्होंने अगले दो साल में इसे घटाकर क्रमश: 3.6 फीसदी और तीन फीसदी करने का भी लक्ष्य रखा.

जेटली ने कहा, “इस बजट में जो घोषणा मैं करने वाला हूं, वह अगले तीन-चार साल में विकास दर को 7-8 फीसदी पहुंचाने और अर्थव्यवस्था में स्थिरता लाने की यात्रा की शुरुआत भर है.”

वहीं संसद में गुरुवार को पेश आम बजट में आम आदमी के लिये आय कर छूट सीमा में वृद्धि का तोहफा मिला, वहीं टीवी, साबुन, जूते-चप्पल, प्रसंस्कृत भोज्य पदार्थो और कंप्यूटर जैसी उपभोक्ता वस्तुओं के सस्ता होने की उम्मीद है.

इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के प्रथम बजट में महंगाई कम करने, निवेश का माहौल बनाने, सरकारी खर्च घटाने और अगले तीन साल में विकास दर को 7-8 फीसदी तक पहुंचाने का वादा किया गया है.

बजट प्रस्तुत करने के बाद जेटली को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “पिछले एक दशक में हम जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उससे निपटने के लिए हम सही दिशा में जा रहे हैं.”

बजट प्रस्तुति के दौरान शेयर बाजार कभी तेजी तो कभी गिरावट में आता-जाता रहा. बंबई स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स एक समय 300 अंकों की तेजी पर देखा गया, तो कुछ समय बाद इसमें 250 अंकों की गिरावट देखी गई. आखिरकार सेंसेक्स करीब 72 अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ.

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